{"_id":"6ad1e7ed3e6187a48b0c0c4d","slug":"sir-syed-ahmad-khan-birth-anniversary-from-a-college-to-amu-how-he-shaped-modern-education-in-india-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर सैयद अहमद खान जयंती: एक कॉलेज से AMU तक का सफर, कैसे बदली भारत में आधुनिक शिक्षा की तस्वीर?","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
सर सैयद अहमद खान जयंती: एक कॉलेज से AMU तक का सफर, कैसे बदली भारत में आधुनिक शिक्षा की तस्वीर?
Sat, 17 Oct 2026 06:05 AM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sat, 17 Oct 2026 06:05 AM IST
सार
Sir Syed Ahmad Khan Birth Anniversary:सर सैयद अहमद खान ने आधुनिक शिक्षा को समाज की तरक्की का माध्यम माना। उनके प्रयासों से 1875 में अलीगढ़ में शुरू हुआ शिक्षण आंदोलन आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना। उनकी जयंती पर जानिए मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना, विज्ञान और अंग्रेजी शिक्षा पर उनका जोर, लेखन में योगदान, महिला शिक्षा से जुड़ी चुनौतियां और आज के विद्यार्थियों के लिए उनकी सोच का महत्व।
विज्ञापन
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जयंती
- फोटो : AI Generated
विस्तार
आज जब छात्र बेहतर कॉलेज, आधुनिक पाठ्यक्रम और अच्छी नौकरी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, तब एक ऐसे व्यक्ति की कहानी याद आती है, जिसने करीब डेढ़ सदी पहले शिक्षा को समाज की तरक्की का रास्ता माना था। उनका नाम था सर सैयद अहमद खान। उन्होंने ऐसे समय में आधुनिक शिक्षा की वकालत की, जब भारतीय समाज कई सामाजिक और शैक्षणिक चुनौतियों से गुजर रहा था। उनका मानना था कि सिर्फ पुरानी परंपराओं के सहारे आगे बढ़ना काफी नहीं, बल्कि विज्ञान, तर्क और आधुनिक ज्ञान को भी अपनाना जरूरी है। इसी सोच ने अलीगढ़ में एक शिक्षण संस्थान की नींव रखी, जो आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) बना। सर सैयद की जयंती पर जानिए, एक कॉलेज से शुरू हुआ यह सफर कैसे भारत के शिक्षा इतिहास का अहम हिस्सा बना और आज के विद्यार्थियों के लिए इसमें क्या सीख छिपी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सर सैयद ने कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों समझी?
सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्तूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था। वे शिक्षाविद्, लेखक और समाज सुधारक थे। 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय समाज में शिक्षा और रोजगार को लेकर कई चुनौतियां थीं। सर सैयद ने महसूस किया कि आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और अंग्रेजी शिक्षा तक पहुंच बढ़ाए बिना समाज की प्रगति मुश्किल होगी। उनका मानना था कि शिक्षा लोगों को नए अवसरों से जोड़ सकती है और उन्हें बदलती दुनिया को समझने में मदद कर सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए। उनका अभियान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव लाना भी उसका अहम हिस्सा था।
विज्ञापन
1875 से 1920 तक कैसे बदला कॉलेज का स्वरूप?
सर सैयद के शिक्षा अभियान का एक बड़ा पड़ाव 1875 में आया, जब अलीगढ़ में मदरसतुल उलूम की शुरुआत हुई। आगे चलकर यह संस्थान मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के रूप में विकसित हुआ। 8 जनवरी 1877 को कॉलेज की आधारशिला रखे जाने के बाद इसके विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ा। संस्थान में आधुनिक और पश्चिमी ज्ञान के साथ पारंपरिक विषयों को भी जगह दी गई। सर सैयद की योजना ऐसे शिक्षण संस्थान की थी, जहां विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा हासिल कर सकें। कई वर्षों के प्रयासों के बाद 1920 में यह कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू बन गया।
विज्ञापन
कमेंट
कमेंट X