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गुजरात विद्यापीठ: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रभारी कुलपति की नियुक्ति, प्रोफेसर भरत जोशी संभालेंगे कार्यभार
Mon, 16 Jan 2023 11:42 AM IST
सौरभ पांडेय
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सौरभ पांडेय
Updated Mon, 16 Jan 2023 11:42 AM IST
सार
Gujarat Vidyapith: गुजरात विद्यापीठ के एक वरिष्ठ प्रोफेसर को इसके प्रभारी कुलपति के रूप में कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है।
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Rajendra Khimani
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
Gujarat Vidyapith: गुजरात विद्यापीठ के एक वरिष्ठ प्रोफेसर को इसके प्रभारी कुलपति के रूप में कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है। दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर इस्तीफा देने वाले कुलपति राजेंद्र खिमानी के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय ने विद्यापीठ को 17 जनवरी से पहले इसके कुलपति की नियुक्ति का आदेश दिया था। जिसके बाद महात्मा गांधी द्वारा स्थापित विद्यापीठ के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर भरत जोशी को नई नियुक्ति होने तक कार्यभार संभालने को कहा गया है। जोशी ने पुष्टि की है कि उन्हें उसी के संबंध में एक फोन आया था। उन्होंने सोमवार को कार्यभार संभालने पर हामी भर दी है।
यूजीसी ने नवंबर 2021 में अहमदाबाद स्थित एक डीम्ड विश्वविद्यालय, विद्यापीठ के कुलपति खिमानी को पद से हटाने का निर्देश दिया था, क्योंकि जांच रिपोर्ट में उनकी नियुक्ति में एक प्रक्रियात्मक चूक पाई गई थी। यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अप्रैल, 2004 से 30 अप्रैल, 2019 के बीच रजिस्ट्रार के रूप में गुजरात विद्यापीठ के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज में खिमानी की ओर से कुछ खामियां भी थीं।
सूत्रों ने कहा कि खिमानी ने गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा उनके संबंध में एक उचित आदेश पारित करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित 17 जनवरी, 2023 की समय सीमा से पहले इस्तीफा दे दिया। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हाल ही में पूर्व कुलपति और सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट (अब दिवंगत) के इस्तीफा देने के बाद विद्यापीठ के नए कुलपति के रूप में पदभार संभाला था।
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खिमानी की नियुक्ति पर गौर करने के लिए गठित एक रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी ने तत्कालीन कुलाधिपति को खिमानी को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया था। यूजीसी ने कहा था कि उसके निर्देशों का पालन करने में विफल रहने पर अनुदान वापस लेने सहित यूजीसी अधिनियम और 2019 के विनियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
खिमानी ने यूजीसी के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और इसे "अवैध, मनमाना और यूजीसी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) विनियम, 2019 के विनियम 10.12.2.ई का उल्लंघन करार दिया था।" उनकी याचिका को खारिज करते हुए, हाईकोर्ट ने 21 सितंबर, 2022 को विद्यापीठ को उचित प्रक्रिया का पालन करने और कानून के अनुसार यूजीसी की रिपोर्ट के आधार पर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
बता दें कि गुजरात विद्यापीठ की स्थापना 18 अक्टूबर, 1920 को महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। उन्होंने इसके आजीवन चांसलर के रूप में कार्य किया था। सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद और मोरारजी देसाई जैसे दिग्गजों ने भी उसी क्षमता में काम किया था।
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यूजीसी ने नवंबर 2021 में अहमदाबाद स्थित एक डीम्ड विश्वविद्यालय, विद्यापीठ के कुलपति खिमानी को पद से हटाने का निर्देश दिया था, क्योंकि जांच रिपोर्ट में उनकी नियुक्ति में एक प्रक्रियात्मक चूक पाई गई थी। यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अप्रैल, 2004 से 30 अप्रैल, 2019 के बीच रजिस्ट्रार के रूप में गुजरात विद्यापीठ के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज में खिमानी की ओर से कुछ खामियां भी थीं।
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सूत्रों ने कहा कि खिमानी ने गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा उनके संबंध में एक उचित आदेश पारित करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित 17 जनवरी, 2023 की समय सीमा से पहले इस्तीफा दे दिया। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हाल ही में पूर्व कुलपति और सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट (अब दिवंगत) के इस्तीफा देने के बाद विद्यापीठ के नए कुलपति के रूप में पदभार संभाला था।
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खिमानी की नियुक्ति पर गौर करने के लिए गठित एक रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी ने तत्कालीन कुलाधिपति को खिमानी को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया था। यूजीसी ने कहा था कि उसके निर्देशों का पालन करने में विफल रहने पर अनुदान वापस लेने सहित यूजीसी अधिनियम और 2019 के विनियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
खिमानी ने यूजीसी के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और इसे "अवैध, मनमाना और यूजीसी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) विनियम, 2019 के विनियम 10.12.2.ई का उल्लंघन करार दिया था।" उनकी याचिका को खारिज करते हुए, हाईकोर्ट ने 21 सितंबर, 2022 को विद्यापीठ को उचित प्रक्रिया का पालन करने और कानून के अनुसार यूजीसी की रिपोर्ट के आधार पर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
बता दें कि गुजरात विद्यापीठ की स्थापना 18 अक्टूबर, 1920 को महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। उन्होंने इसके आजीवन चांसलर के रूप में कार्य किया था। सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद और मोरारजी देसाई जैसे दिग्गजों ने भी उसी क्षमता में काम किया था।
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