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Self Employement: अब स्टील मिल से निकले कचरे से बनेंगे उपयोगी सामान, कम होगी प्रदूषण की समस्या

Sun, 27 Mar 2022 05:50 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Sun, 27 Mar 2022 05:50 PM IST
सार

संदीप ने बताया कि इस प्रक्रिया में कम ऊर्जा का प्रयोग होता है। भट्टी और बिजली का प्रयोग न करने के कारण यह तकनीत शत प्रतिशत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त है।

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Self Employement IIT Mandi start-up uses green tech to convert steel mills waste into useable products Will reduce pollution
Self Employement - फोटो : Social Media

विस्तार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के तत्वाधान में एक स्टार्टअप सामने आया है जो लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है। जो इसके अंतर्गत स्टील मिलों से निकले हुए कचरे को प्राकृतिक रूप (ग्रीन टेक्नोलॉजी) के माध्यम से उपयोगी सामाग्री का निर्माण किया जाएगा। इस तकनीक के प्रयोग में ऊर्जा का कम प्रयोग किया जाएगा, जिससे प्रदूषण की समस्या से भी बचा जा सकेगा। 

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दरअसल, स्टील फैक्ट्री की ओर से बड़े स्तर पर कचरा निकलता है जिसे मैदानी क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। यह कचरा पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है। इसी समस्या से निपटने के लिए ग्रीन ट्रेक, एक जम्मू और कश्मीर स्थित स्टार्ट-अप आगे आया है। इसे सतिंदर नाथ गुप्ता और उनके बेटे संदीप गुप्ता द्वारा स्थापित किया गया है। यह प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए निकालने वाले धातु विज्ञान का उपयोग करता है। 

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एक्स्ट्रेक्टिव मेटलर्जी तकनीक का उपयोग
अधिकारियों ने बताया कि स्टार्टअप के द्वारा स्टील मिल के कचरे को उच्च लौह सामग्री के साथ धातु में ट्रिम करने के लिए स्वच्छ दहन तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। आगे जाकर इसे जहाज निर्माण, स्टोन क्रशिंग प्लांट, तेल और गैस संयंत्र और बिजली संयंत्र जैसे उद्योगों द्वारा दोबारा प्रयोग में लाया जा सकता है। संदीप गुप्ता ने पीटीआई से बताया कि हम एक्स्ट्रेक्टिव मेटलर्जी तकनीक का उपयोग करके एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों को कम किया जा सकेगा और एक स्थायी कचरा प्रबंधन प्रक्रिया लागू की जा सकेगी।

तकनीक शत प्रतिशत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त
संदीप ने आगे बताया कि इस प्रक्रिया में कम ऊर्जा का प्रयोग होता है। भट्टी और बिजली का प्रयोग न करने के कारण यह तकनीक शत प्रतिशत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त है। इससे कम से कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है। इस कचरे को अन्य धातुओं के साथ में मिलाकर कई उपयोगी चीजे बनाई जा सकती है। ग्रीन ट्रेक ने हिमाचल प्रदेश में एक स्थायी संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए हैं। इसके तहत अल्ट्राटेक, एसीसी और अंबुजा सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियों को मदद दी जाएगी। सरकार की ओर से भी इसमें मदद दी जाएगी। 

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युवा कर सकते हैं तकनीक का इस्तेमाल
वर्तमान समय में देश के युवा सरकारी या प्राइवेट नौकरी के बजाय स्वरोजगार की ओर ध्यान देने लगे हैं। ऐसे में यह तकनीक उन युवाओं के लिए भी एक मार्गदर्शन का काम कर सकती है। देश के युवा ऐसी तकनीक या नवाचार के माध्यम से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार पैदा करने की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

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