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WB: नॉन-टीचिंग स्टाफ को आर्थिक सहायता देने वाले मामले पर फैसला सुरक्षित, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश
Mon, 09 Jun 2025 05:59 PM IST
आकाश कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकाश कुमार
Updated Mon, 09 Jun 2025 05:59 PM IST
सार
WB: पश्चिम बंगाल सरकार की नॉन-टीचिंग स्टाफ को आर्थिक सहायता देने वाली योजना पर कोलकाता हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हटाए गए कर्मचारियों को 25,000 व 20,000 रुपये देने पर याचिका दायर की गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
Kolkata: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार की उस योजना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वाले नॉन-टीचिंग स्टाफ को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
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न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा जिसमें राज्य सरकार द्वारा ग्रुप सी कर्मचारियों को 25,000 रुपये और ग्रुप डी कर्मचारियों को 20,000 रुपये देने के निर्णय का विरोध किया गया था।
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पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में एक योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया से चुने गए और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हटाए गए नॉन-टीचिंग स्टाफ के परिवारों को मानवीय आधार पर सीमित आजीविका सहायता और सामाजिक सुरक्षा देना है। यह सहायता अस्थायी रूप से दी जा रही है और यह किसी सक्षम न्यायालय के आदेशों के अधीन है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2016 की चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया गया था, जिसके कारण पश्चिम बंगाल के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लगभग 26,000 शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय कर्मचारी अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे।
इस याचिका को 2016 की भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट में शामिल कुछ अभ्यर्थियों द्वारा दायर किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश भट्टाचार्य ने कोर्ट में यह सवाल उठाया कि राज्य सरकार को किस अधिकार से सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के फैसले को बदलने वाला कानून या योजना बनाने का अधिकार है?
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि यह योजना सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन करती है जिसमें इन नियुक्तियों को रद्द किया गया था। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 162 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की कार्यपालिका शक्तियां संविधान के अंतर्गत आती हैं और यह किसी न्यायिक फैसले को विफल करने के लिए योजना बनाने का अधिकार नहीं देती। उन्होंने कोर्ट से इस योजना पर रोक लगाने की अपील की।
कोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने इस योजना को लागू कर दिया है, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने बताया कि योजना के तहत एक किस्त जारी कर दी गई है। इसके बाद न्यायमूर्ति सिन्हा ने मौखिक रूप से राज्य सरकार से कहा कि फिलहाल इस योजना के तहत कोई और राशि न वितरित की जाए।
वहीं, याचिका का विरोध करते हुए एडवोकेट जनरल दत्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता, जो वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी हैं, इस योजना से किसी प्रकार की हानि में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं को लगता है कि यह योजना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करती है, तो उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। अब इस मामले में अंतिम निर्णय कोर्ट के सुरक्षित आदेश के बाद सामने आएगा।