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SC: एएमयू कुलपति नाइमा खातून की नियुक्ति मामले में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, खारिज की अपील

Mon, 08 Sep 2025 07:40 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 08 Sep 2025 07:40 PM IST
सार

AMU: सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू की कुलपति नाइमा खातून की नियुक्ति में दखल देने से इनकार किया। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज की गई। खातून एएमयू की पहली महिला कुलपति हैं। पति के वोट को लेकर हितों के टकराव का आरोप भी लगा था।
 

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SC rejects appeal against AMU VC Naima Khatoon’s appointment, upholds HC order
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

AMU VC Appointment: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की कुलपति प्रोफेसर नाइमा खातून की नियुक्ति में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने प्रोफेसर मुजफ्फर उरूज रब्बानी और फैजान मुस्तफा की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने नाइमा खातून की नियुक्ति को सही ठहराया था। नाइमा खातून एएमयू के इतिहास की पहली महिला कुलपति हैं।

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जस्टिस चंद्रन ने खुद को किया सुनवाई से अलग

इससे पहले 18 अगस्त को सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच का हिस्सा रहे जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। मामला बाद में जस्टिस माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली बेंच के पास पहुंचा, जिसने अपील खारिज कर दी।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि खातून कुलपति इसलिए बनीं क्योंकि उन्हें अपने पति का निर्णायक वोट मिला। उस समय उनके पति एएमयू के कुलपति थे। पति का अपनी पत्नी के पक्ष में वोट देना हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) बताया गया।

जस्टिस चंद्रन ने खुद को मामले से अलग करते हुए कहा, "मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) का चांसलर था, जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था। इसलिए मैं इस सुनवाई से अलग हो रहा हूं।"

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "हमें जस्टिस चंद्रन पर पूरा भरोसा है। उन्हें अलग होने की जरूरत नहीं है। वे इस पर फैसला ले सकते हैं।"

लेकिन सीजेआई ने कहा, "यह मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) पर निर्भर है। इस मामले को ऐसी बेंच के पास भेजा जाए, जिसमें जस्टिस चंद्रन शामिल न हों।"

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