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Hindi News ›   Education ›   process for admission to the academic session 2020 21 at Delhi University has ended

डीयू: अब कॉमर्स और आर्ट्स में रुझान, बीते दशक में बदली तस्वीर

Mon, 04 Jan 2021 07:03 AM IST
Jeet Kumar रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 04 Jan 2021 07:03 AM IST
सार

  • -इस दौरान 10 परसेंट तक बढ़ गया डीयू का कट ऑफ स्तर
  • -वर्ष 2000 से पहले साइंस कोर्सेज में होती थी ज्यादा बढ़ोतरी
  • -इसके बाद कॉमर्स और आर्ट्स कोर्सेज ने भी पकड़ी रफ्तार
  • -बीते पांच सालों में बीए और ह्यूूमेनिटीज कोर्सेज में बढने लगी रूचि
  • -इन कोर्सेज की कट ऑफ भी सौ केआंकड़े को छूने लगी है

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process for admission to the academic session 2020 21 at Delhi University has ended
दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : Twitter

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में दाखिले के लिए दाखिला प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस साल कुछ कोर्सेज के लिए कुछ कॉलेजों ने सौ फीसदी कट ऑफ जारी कर सबको हैरान कर दिया। यह पहली बार नहीं है कि जब कट ऑफ ने शतक लगाया है।

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इससे पहले भी दो बार कट ऑफ सौ फीसदी जारी की गई। जानकार बताते हैं कि दाखिले के लिए जारी होने वाली कट ऑफ लिस्ट में बीते कुछेक सालों में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिले हैं।
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खासतौर पर पिछले एक दशक की बात करें तो डीयू की कट ऑफ लिस्ट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। कभी 85 फीसदी के आसपास रहने वाली कट ऑफ अब 95 से 100 फीसदी के आंकड़े पर आ गई है।  
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पहले जहां साइंस कोर्सेज की कट ऑफ ज्यादा ऊंची जाती थी, वहीं अब कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम के कोर्सेज ने कट ऑफ में बढ़ोतरी के मामले में साइंस को पछाड़ दिया है। बीते चार-पांच सालों में तो बीए प्रोग्राम, राजनीति विज्ञान, इतिहास, साइकोलॉजी विषय की कट ऑफ 99 फीसदी तक जा रही है।

इसका कारण है इन कोर्सेज में सामने आए करियर के नए-नए विकल्प। अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 2010 से अब तक कट ऑफ स्तर में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है।

डीयू से जुड़े जानकार मानते हैं कि वर्ष 90 से 2000 के समय में डीयू के लगभग सभी कॉलेजों में साइंस की कट ऑफ लिस्ट के स्तर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती थी। लेकिन 2000 केबाद स्थिति कुछ बदलने लगी। उसकेबाद 2010 केबाद से स्थिति काफी बदल गई है।

रऊंची कट ऑफ के मामले में साइंस का स्थान कॉमर्स कोर्सेज ने ले लिया। वहीं दो-तीन सालों बाद ही आर्ट्स कोर्सेज भी चुपचाप कट ऑफ लिस्ट की दौड़ में शामिल होते गए।

यही कारण रहा कि 2010 से डीयू के टॉप कॉलेजों ही नहीं, बल्कि आम कॉलेजोभं में भी बीकॉम ऑनर्स और बीए इकॉनॉमिक्स ऑनर्स और बीए इंग्लिश ऑनर्स, बीए राजनीति विज्ञान ऑनर्स, बीए साइकोलॉजी ऑनर्स, बीए इतिहास ऑनर्स जैसे कोर्सेज में कट ऑफ लिस्ट के स्तर ने 95 फीसदी से अधिक का आंकड़ा छू लिया।  

मौजूदा समय में यह स्तर 99 फीसदी के पार भी पहुंचने लगा है। जबकि सीमित करियर विकल्पों के चलते साइंस कोर्सेज इस दौड़ में अब काफी पीछे रह गए हैं।

पिछले कुछ सालों में कट ऑफ लिस्ट में हुई वृद्धि (प्रतिशत में)

वर्ष कॉमर्स आर्ट्स साइंस
2020 1 से 2 1.5 से 4 0.25 से 1.5
2019 1 से 2 1 से 2.5 0.25 से 1.0
2018 1 से 1.5 1 से 1. 0.50 से 1.0
2016 0.75 से 1.5 1 से 2 0.50 से 1.0
2015 0.50 से 1. 1 से 2  0.25 से 1.0

क्या कहते हैं प्रिंसिपल
श्री अरबिंदो कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ विपिन अग्रवाल कहते हैं कि वर्ष 90 तक साइंस कोर्सेज का वर्चस्व था। लेकिन उसकेबाद कॉमर्स व ह्यूमेनिटीज विषयों में जॉब के विकल्प बढने लगे। लिहाजा छात्र बीए कोर्सेज में दाखिले लेने में ज्यादा रुचि लेने लगे। इसीलिए कट ऑफ भी बढने लगी है।

उन्होंने इस साल बीए(इको-कॉमर्स) कॉम्बिनेशन में हुए दाखिले का हवाला देते हुए कहा कि बीते साल के मुकाबले में इस कोर्स में तीन से चार फीसदी की बढ़ोतरी की थी बावजूद पहली कट ऑफ में ही सीटों केमुकाबले में तिगुने दाखिले हो गए।

राजधानी कॉलेज प्रिंसिपल डॉ राजेश गिरी कहते हैं कि बीते 5-6 सालों के ट्रेेंड को देखें तो 90-95 फीसदी अंक लाने वाले छात्र लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण से कट ऑफ में लगातार उछाल आता जा रहा है। वह इसे सीबीएसई के मूल्यांकन से भी जोड़ कर देखते हैं।


वह कहते हैं कि अंग्रेजी में भी अब छात्रों के सौ फीसदी अंक आने लगे हैं। वहीं बीते कुछ सालों में इको में दाखिला लेने वाले भी बढ़े हैं क्योंकि इस कोर्स में जॉब का स्कोप बढ़ा है। वहीं साइंस कोर्सेज के बच्चे अब ईको, पॉलिटिक्ल साइंस, कॉमर्स जैसे कोर्सेज में शिफ्ट होने लगे हैं।

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