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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक हजार वर्ष के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ

Sun, 28 Jan 2018 02:05 PM IST
स्टीफन कैस्ल
स्टीफन कैस्ल Updated Sun, 28 Jan 2018 02:05 PM IST
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Oxford university- Girls ahead from boys in admission
Oxford University

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के करीब एक हजार वर्ष के इतिहास में पहली बार नए दाखिले के मामले में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ दिया। ताजा आंकड़े के मुताबिक, विगत जाड़े में अंडरग्रेजुएट में 1,070 छात्राओं ने दाखिला लिया, जबकि छात्रों की संख्या 1,025 रही।

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वैसे तो पूरी 20 वीं शताब्दी में ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में लड़कियों की संख्या लड़कों से कम रही, पर 1990 में लड़के-लड़कियों की बीच की दूरी कम हुई। वर्ष 2000 में 1,33,000 से अधिक महिलाओं ने फर्स्ट डिग्री हासिल की, जो अमेरिका में स्नातक की डिग्री के बराबर है। इस दौरान फर्स्ट डिग्री हासिल करने वाले पुरुषों की संख्या 1,10,000 ही रही। 2011 में ब्रिटिश विश्वविद्यालयों से 1,97,565 महिलाओं ने फर्स्ट डिग्री हासिल की, जबकि इस दौरान यह डिग्री हासिल करने वाले पुरुषों की तादाद 1,53,235 रही।
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2016 में हायर एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने छात्रों और छात्राओं के बीच पैदा होते फर्क को ‘राष्ट्रीय कलंक’ बताते हुए इस संदर्भ में एक आंकड़ा जारी किया, जिसके मुताबिक, ब्रिटेन में छात्रों के दाखिले का प्रतिशत छात्राओं के दाखिले की तुलना में 9.2 प्रतिशत कम था।
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अमेरिका में छात्रों और छात्राओं के दाखिले का अंतर तो और भी अधिक है। डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन के 2017 के जाड़े के आंकड़े के मुताबिक अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हुए कुल दाखिले में 56 फीसदी महिलाएं हैं। हालांकि नामचीन अमेरिकी विश्वविद्यालयों में तस्वीर थोड़ी अलग है। हार्वर्ड के फ्रेशमैन क्लास में छात्राओं की संख्या 50 प्रतिशत से कम है, जबकि स्टेनफोर्ड में 51 फीसदी महिलाएं हैं।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर तथा द राइज ऑफ वुमैन के लेखक थॉमस ए डीप्रीटे कहते हैं, नामचीन विश्वविद्यालय लैंगिक संतुलन बनाए रखने में इसलिए सफल होते हैं, क्योंकि उनके पास दाखिले के लिए अधिक योग्य छात्रों के आवेदन आते हैं, और वे ऐसे छात्रों को चुनते हैं, जो संस्थान की छवि बरकरार रख सकें। हाल के वर्षों में निचली सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के परिवारों से उच्च शिक्षा संस्थानों में लड़कियों के दाखिले के अधिक आवेदन आने लगे हैं।

20 वीं शताब्दी के मध्य में लड़कों की तुलना में कम लड़कियों का दाखिला लेना कम पढ़े-लिखे समाज की सच्चाई था। कॉलेज की पढ़ाई कर चुके माता-पिता अपनी लड़कियों को उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला दिलाते हैं। आज समाज में उच्च शिक्षित लोग बढ़ रहे हैं, इसलिए कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में लड़कियों का दाखिला भी बढ़ रहा है।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने ऑक्सफोर्ड से आई खबर का स्वागत किया है। सरकार के पूर्व सलाहकार और हायर एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक निक हिलमैन कहते हैं, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण क्षण है। हम अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकते कि समय बदल रहा है, पर यह आज की सच्चाई तो है ही। ऑक्सफोर्ड में दाखिले के इस आंकड़े ने दिखा दिया है कि लड़कियों ने शिक्षा व्यवस्था में बेहद प्रगतिशील तरीके से लड़कों को पीछे छोड़ दिया है।’

लैंगिक समानता के लिए काम करने वाली फॉसेट सोसाइटी की मुख्य कार्यकारी सैम स्मीदर्स ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि बेहद महत्वपूर्ण दिशा में यह एक कदम भर है। उन्होंने कहा, ‘ऑक्सफोर्ड की इस प्रगति को देखना सुखद है, पर यह भी देखना होगा कि उन छात्राओं ने किस विषय में दाखिला लिया है, और उनके विश्वविद्यालय से निकलने के बाद क्या होता है, क्योंकि हम जानते हैं कि गणित, विज्ञान और इंजीनियरिंग में लड़कियां अब भी लड़कों से पीछे हैं। फिर स्नातक महिलाएं कार्यस्थल में पुरुषों की तुलना में मिलने वाले कम वेतन की भी गवाह हैं।’

ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज की इस कारण आलोचना होती रही है कि वे दाखिले में एटन और हैरो जैसे संभ्रांत ब्रिटिश पब्लिक स्कूलों के छात्रों को वरीयता देते हैं। 2015 में ऑक्सफोर्ड के हर तीन में से एक कॉलेज में एक भी अश्वेत ब्रिटिश हाई स्कूल ग्रेजुएट को दाखिला नहीं मिला।

विपक्षी लेबर पार्टी के सांसद डेविड लेमी ने तब इसे ‘दाखिले में रंगभेद’ की संज्ञा दी थी। खुद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने छात्राओं के अधिक दाखिले पर बहुत सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि एक साल के दाखिले के आंकड़े पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी है, पर यह स्वागतयोग्य तो है ही।

एग्नेस हेडलैम-मोर्ली पहली महिला थीं, जिन्हें ऑक्सफोर्ड में प्रोफेसरशिप मिली। 1948 में वह इंटरनेशनल रिलेशंस में मांटेग्यू बर्टन प्रोफेसर नियुक्त हुईं। 2016 में ऑक्सफोर्ड ने एक और नई ऊंचाई छुई, जब लुइस रिचर्डसन वहां की पहली महिला वायस चांसलर बनीं।

ऑक्सफोर्ड खुद को अंग्रेजी की दुनिया का सबसे पुराना विश्वविद्यालय बताता है। इसकी स्थापना की सही तारीख तो मालूम नहीं, पर 1096 में वहां पढ़ाई शुरू हुई। ​1167 में ऑक्सफोर्ड का तब तेजी से विकास हुआ, जब हेनरी द्वितीय ने अंग्रेज छात्रों के पेरिस यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। 1878 में वहां महिलाओं के लिए एकेडेमिक हॉल बने, पर लड़कियों को ग्रेजुएशन करने की मंजूरी वहां 1920 में मिली। 

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