नीट यूजी 2026: मोटी फीस कॉलेजों के लिए बनी बड़ी मुसीबत, किस राज्य में खाली रह गईं एमबीबीएस की 824 सीटें?
नीट यूजी 2026 की अंतिम काउंसलिंग के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की 824 सीटें खाली हैं। शिक्षा विशेषज्ञों ने इसकी मुख्य वजह भारी फीस को बताया है।
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नीट यूजी 2026 की अंतिम काउंसलिंग पूरी होने के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की 800 से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक, इन सीटों के खाली रहने की सबसे बड़ी वजह निजी संस्थानों की महंगी फीस है।
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) के सूत्रों के अनुसार, देशभर में अखिल भारतीय कोटे की सीटों सहित एमबीबीएस की कुल 837 सीटें खाली हैं। इनमें से 824 सीटें अकेले तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में हैं।
महंगी फीस के कारण योग्य विद्यार्थी भी नहीं ले पा रहे दाखिला
शिक्षा विशेषज्ञों ने डीम्ड विश्वविद्यालयों की फीस पर अधिकतम सीमा नहीं होने की आलोचना की है। उनका कहना है कि नीट में अच्छे अंक हासिल करने वाले कई विद्यार्थी केवल आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इन संस्थानों में दाखिला नहीं ले पाते। इससे योग्यता के आधार पर चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश देने की व्यवस्था के उद्देश्य पर सवाल उठते हैं।
स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु (एसपीसीएसएस-टीएन) के महासचिव और वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ पीबी प्रिंस गजेंद्र बाबू ने पीटीआई से कहा कि नीट में अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी भी आर्थिक स्थिति के कारण महंगी फीस वाले निजी संस्थानों में दाखिला नहीं ले पाते। ऐसे विद्यार्थी काउंसलिंग के लिए आवेदन ही नहीं करते।
उन्होंने कहा, “कम अंक पाने वाला, लेकिन आर्थिक रूप से सक्षम विद्यार्थी आवेदन करता है और सीट हासिल कर लेता है।”
गजेंद्र बाबू ने आगे कहा, “नीट अपने दोनों उद्देश्यों में विफल रहा है। न तो यह योग्यता सुनिश्चित कर पाया और न ही चिकित्सा शिक्षा के व्यावसायीकरण पर रोक लगा पाया।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिन निजी चिकित्सा शिक्षण संस्थानों, जिनमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं, के लिए फीस कम करना संभव नहीं है और वे सीटें खाली छोड़ रहे हैं, उन्हें बंद कर देना चाहिए। उनके मुताबिक, राज्य सरकारों को जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
सालाना 25 से 35 लाख रुपये तक है एमबीबीएस की फीस
उच्च शिक्षा और करियर परामर्शदाता ए. श्रीनाथ ने कहा कि तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की सालाना फीस लगभग 25 लाख से 35 लाख रुपये तक है।
उन्होंने बताया कि निजी संस्थानों में विद्यार्थियों को छात्रावास और भोजन के लिए हर साल करीब 1.2 लाख से 2.5 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। इसके मुकाबले, देश के अन्य हिस्सों के निजी संस्थानों में एमबीबीएस की औसत सालाना फीस लगभग 17 लाख रुपये बताई गई है। साढ़े चार साल के पाठ्यक्रम की अवधि में यह अंतर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालता है।
क्या खाली सीटों के लिए फिर होगी काउंसलिंग?
सीटें खाली रहने के कारण अतिरिक्त काउंसलिंग राउंड आयोजित किए जाने की संभावना है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय मेडिकल काउंसलिंग कमेटी को लेना है। श्रीनाथ के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि खाली सीटों को भरने के लिए एक और काउंसलिंग राउंड आयोजित किया जाएगा या नहीं।
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