पहल: अब मिड-डे मील में बच्चों को मिलेगा 200 मिलीलीटर दूध, इस राज्य सरकार ने की योजना शुरू करने की घोषणा
Mid-Day Meal: गोकुलानंद मल्लिक ने मंगलवार को कहा कि सरकार मध्याह्न भोजन योजना में फोर्टिफाइड दूध को शामिल करने पर विचार कर रही है। योजना के तहत स्कूली बच्चों को प्रतिदिन 200 मिलीलीटर विटामिन ए और डी से भरपूर दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
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Odisha: स्कूली बच्चों के पोषण को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा सरकार ने एक नई योजना शुरू करने की घोषणा की है। राज्य के मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने मंगलवार को कहा कि सरकार मध्याह्न भोजन योजना में फोर्टिफाइड दूध को शामिल करने पर विचार कर रही है। योजना के तहत स्कूली बच्चों को प्रतिदिन 200 मिलीलीटर विटामिन ए और डी से भरपूर दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
राष्ट्रपति ने की 'गिफ्ट मिल्क' पहल की शुरुआत
यह बयान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की 'गिफ्ट मिल्क' पहल का वर्चुअल शुभारंभ करने के बाद आया। इस पहल के तहत, रायरंगपुर के 29 स्कूलों में लगभग 1,184 छात्रों को इस दूध का लाभ मिलेगा। पहले चरण में, यह कार्यक्रम मयूरभंज जिले के 200 गांवों में लागू किया गया है। मंत्री मल्लिक ने कहा कि पायलट परियोजना के सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
44.5 लाख बच्चों को मिलता है मध्याह्न भोजन
वर्तमान में ओडिशा के 51,500 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 44.5 लाख बच्चों को मध्याह्न भोजन योजना के तहत पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। नई योजना के तहत, पोषण स्तर को और बेहतर बनाने के लिए फोर्टिफाइड दूध जोड़ा जाएगा।
डेयरी किसानों के लिए सहायता
राज्य सरकार डेयरी किसानों के उत्थान के लिए भी बड़े कदम उठा रही है। मंत्री ने बताया कि गुजरात से उच्च गुणवत्ता वाली 3,000 गायों को मयूरभंज जिले के किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। इस पहल को राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसके लिए 38 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।
मुख्यमंत्री कामधेनु योजना
ओडिशा सरकार 'मुख्यमंत्री कामधेनु योजना' के तहत राज्य में डेयरी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस योजना के तहत, 1,423.47 करोड़ रुपये के बजट के साथ पांच साल की परियोजना चलाई जाएगी। योजना के अंतर्गत छोटी डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहन, बछड़ों के लिए रियायती चारे की उपलब्धता, पशुधन बीमा कवरेज में वृद्धि और डेयरी सहकारी समितियों को सशक्त बनाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य न केवल बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना है, बल्कि डेयरी किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करना है। सरकार की इन योजनाओं से राज्य में दूध उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है।
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