Education: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश नीदरलैंड करेगा सीमित , विवि में अंग्रेजी का उपयोग किया जाएगा कम
Education: नीदरलैंड के शिक्षा मंत्री ने छात्र आवास की कमी और व्याख्यान कक्षों में अत्यधिक भीड़ का हवाला देते हुए डच भाषा को प्राथमिकता देने के अपने उद्देश्य पर जोर दिया। वर्तमान में, तीन में से एक स्नातक कार्यक्रम डच और अंग्रेजी के मिश्रण में पेश किया जाता है।
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Education: डच सरकार विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी के उपयोग को कम करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए पहले एक प्रस्ताव भी पेश किया गया। इसको आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाना है। मंगलवार को शिक्षा मंत्री एप्पो ब्रुइंस ने संसद को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा में डच को प्राथमिक भाषा के रूप में फिर से स्थापित करने की बात कही। डच सांख्यिकी एजेंसी के अनुसार, पिछले साल लगभग 123,000 विदेशी छात्रों ने उच्च शिक्षा में दाखिला लिया था, जो विश्वविद्यालय की आबादी का 15% था। उनमें से तीन-चौथाई से ज़्यादा छात्र दूसरे यूरोपीय देशों से थे।
एक साक्षात्कार में शिक्षा मंत्री ने बताया कि "जब हम उच्च शिक्षा में केवल डच भाषा का उपयोग करेंगे, तभी हम विश्व में सबसे आगे होंगे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र नीदरलैंड में आते रहेंगे, भाषा संबंधी कितनी ही पाबंदियां हों। उन्होंने कहा कि छात्र आवास की कमी, व्याख्यान कक्षों में अत्यधिक भीड़, तथा विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण डच भाषा शिक्षा पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने डच भाषा को प्राथमिकता देने की बात कही।
शिक्षा मंत्री ने कहा, "नीदरलैंड एक अंतरराष्ट्रीय ज्ञान केंद्र है। उन्होंने बताया यहां अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या बढ़ी है, लेकिन आवास की कमी है। इसके कारण डच भाषा का उपयोग कम होता जा रहा है। उन्होंने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डच भाषा को फिर से आदर्श बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे डच भाषा कौशल में सुधार करना चाहते हैं। ताकि अंतरराष्ट्रीय छात्र स्नातक होने के बाद हमारी अर्थव्यवस्था और समाज में योगदान करें।"
एक्स पर एक पोस्ट में ब्रुइंस ने कहा कि मैं चाहता हूं कि डच भाषा उच्च व्यावसायिक शिक्षा और विश्वविद्यालयों में मानक बने। अंतर्राष्ट्रीय और डच दोनों ही छात्रों को डच भाषा में दक्षता हासिल करने में निवेश करने की आवश्यकता है। इससे अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को लंबे अरसे तक बने रहने का मौका मिलेगा।" ब्रुइन्स ने नफ़िक द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा, "शोध से पता चलता है कि कार्यस्थल और समाज में भाषा संबंधी बाधाएं अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बाधाएँ हैं। भाषा दक्षता बढ़ाकर, हम पाँच वर्षों के बाद अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की वर्तमान 25% प्रतिधारण दर को बढ़ा सकते हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा यह बदलाव नए मंत्रिमंडल के एजेंडे का हिस्सा है, जो जुलाई में सत्ता में आया था और अब तक देश की सबसे सख्त प्रवास विरोधी नीतियों को आगे बढ़ा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, स्नातक पाठ्यक्रमों का एक तिहाई से अधिक हिस्सा डच के अलावा किसी अन्य भाषा में नहीं पढ़ाया जाएगा। एक विशेष समिति पूरी तरह से अंग्रेजी में संचालित कार्यक्रमों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार होगी। वर्तमान में, तीन में से एक स्नातक कार्यक्रम डच और अंग्रेजी के मिश्रण में पेश किया जाता है। सरकार डच को विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन बोर्डों के लिए मानक भाषा बनाने की भी योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के बीच डच भाषा कौशल में सुधार से स्नातक होने के बाद भी उनके रहने और कार्यबल में योगदान देने की संभावना बढ़ेगी।
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