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NAAC: नैक की एक्रेडिटेशन प्रक्रिया लंबी और जटिल, संसदीय पैनल ने की तत्काल सुधार की मांग

Wed, 10 Dec 2025 09:30 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 10 Dec 2025 09:30 AM IST
सार

UGC Chairperson: हायर एजुकेशन संस्थानों की एक्रेडिटेशन प्रक्रिया को लेकर संसदीय पैनल ने गंभीर चिंता जताई है। पैनल का कहना है कि नैक द्वारा किया जाने वाला मूल्यांकन बेहद लंबा, जटिल और गैर-जरूरी ब्यूरोक्रेसी से भरा है, जिसकी विश्वसनीयता को तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।

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NAAC accreditation processes long, bureaucratic and cumbersome: Parliamentary panel
राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) - फोटो : FB(@NAAC-India)

विस्तार

Bureaucratic Process: एक संसदीय पैनल ने हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स (HEIs) की एक्रेडिटेशन और री-एक्रेडिटेशन प्रक्रिया को लेकर टिप्पणी की है। पैनल का कहना है कि NAAC की मौजूदा प्रक्रिया बहुत लंबी, अत्यधिक ब्यूरोक्रेटिक और काफी कठिन है, इसलिए इसमें तुरंत सुधार किए जाने चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि NAAC की विश्वसनीयता (credibility) जो हाल के समय में प्रभावित हुई है, उसे जल्द से जल्द फिर से बहाल किया जाना चाहिए।

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इसके अलावा, कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली एजुकेशन, महिला, बच्चे, युवा और खेल से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने UGC में नेतृत्व की कमी का भी जिक्र किया है। कमिटी ने सिफारिश की है कि UGC के लिए नया चेयरपर्सन बिना देर किए नियुक्त किया जाए, ताकि संस्थान बेहतर तरीके से अपना काम कर सके।

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एक्रेडिटेशन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की जोरदार मांग

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "एक्रेडिटेशन या री-एक्रेडिटेशन का मौजूदा प्रोसेस लंबा और ब्यूरोक्रेटिक है, जिसमें हर साल पांच री-एक्रेडिटेशन और सालाना रिपोर्ट होती हैं, जिनमें यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेटर्स को काफी समय लगता है। इस प्रोसेस में एक्रेडिटेशन टीम को साइट विजिट भी करना पड़ता है, जो मुश्किल है। HEIs के लिए NAAC के एक्रेडिटेशन प्रोसेस को आसान बनाने की जरूरत है ताकि पूरा प्रोसेस जल्दी हो और बिना किसी फालतू ब्यूरोक्रेटिक रुकावट के हो।"

 

NAAC और रैंकिंग के बीच ओवरलैप पर, पैनल ने कहा, "NAAC द्वारा इंस्टीट्यूशन्स की ग्रेडिंग गैर-जरूरी है। एक बाइनरी एक्रेडिटेशन मॉडल… लागू करने में आसान होगा, ब्यूरोक्रेटिक प्रोसेस को आसान बनाएगा, और NAAC की ग्रेडिंग में अपनी मर्जी का दायरा कम करेगा।"

NAAC की साख बहाल करने और UGC में नेतृत्व की कमी दूर करने पर जोर

नैक से जुड़े रिश्वत मामले का ज़िक्र करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि नैक में रिश्वत के एक हालिया मामले की जांच चल रही है और सिफारिश की गई है कि इस मामले में पूरी इंटरनल जांच शुरू की जानी चाहिए और जांच के नतीजे कमिटी के साथ शेयर किए जा सकते हैं।

 

पैनल ने "लगभग 200 इंस्टीट्यूशन की ग्रेडिंग में बदलाव और लगभग 900 पीयर असेसर को हटाने" को मानते हुए कहा कि नैक की क्रेडिबिलिटी को वापस लाना बहुत जरूरी है।

 

पैनल ने कहा कि UGC के चेयरपर्सन का पद अप्रैल 2025 से खाली है और सरकार को याद दिलाया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अनुसार, "लीडरशिप के पद खाली नहीं रहेंगे, बल्कि लीडरशिप में बदलाव के दौरान एक ओवरलैपिंग टाइम पीरियड नॉर्म होगा।" इसलिए यह "सुझाव देता है कि UGC के लिए जल्द से जल्द एक नया चेयरपर्सन अपॉइंट किया जाना चाहिए।"

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ICHR, ICPR और ICSSR में फंडिंग और फेलोशिप बढ़ाने की सिफारिश

कमेटी ने इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (ICHR), इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसर्च (ICPR) और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) में फंडिंग की कमी, कम फेलोशिप, इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी और लंबे समय से खाली पदों पर चिंता जताई है, और चेतावनी दी है कि मौजूदा सपोर्ट लेवल उनके "क्रिटिकल फंक्शन" के साथ मेल नहीं खाते हैं।

 

ICHR पर, पैनल ने कहा कि "ICHR के लिए मौजूदा बजट" अभी भी काफी नहीं है और "काउंसिल के जरूरी कामों को देखते हुए, इसके बजट को बढ़ाने की जरूरत पर फिर से जोर दिया गया है।"

 

इसने बताया कि जूनियर रिसर्च फेलोशिप "पूरे देश में 80 स्टूडेंट्स तक लिमिटेड है" और "17,600 रुपये... का स्टाइपेंड काफी नहीं है, क्योंकि UGC का JRF हर महीने 37,000 रुपये है।" इसने "फेलोशिप की रकम और फेलोशिप पाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी" की सिफारिश की।

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