अब डाक्टर बनने की राह हुई मुश्किल, युवाओं को देनी होगी एक और परीक्षा
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देशभर में एमबीबीएस पास करने वालों के लिए सीधे डॉक्टरी की राह मुश्किल होने वाली है। अब युवाओं को इसके लिए एक और परीक्षा से गुजरना होगा।
बता दें कि, केंद्र सरकार नए साल में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पास करने जा रही है। इसके बाद एमबीबीएस पास करने वाले युवाओं को प्रैक्टिस करने के लिए विशेष परीक्षा देनी होगी। इस नियम का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन विरोध कर रही है। उत्तराखंड में यह नियम लागू होने से चिकित्सकों की कमी और बढ़ जाएगी।
केंद्र सरकार मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन लाने की तैयारी में है। इसके तहत एमबीबीएस की डिग्री वाले डॉक्टरों को एक एग्जाम देकर प्रैक्टिस के लिए क्वालिफाई करना होगा।
एग्जाम क्वालिफाई न होने की सूरत में प्र्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर, विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वालों को विशेष परीक्षा पास करने से मुक्ति मिल गई है। उत्तराखंड में चिकित्सकों की भारी कमी है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कर रही विरोध
पहाड़ के तमाम चिकित्सालयों में एमबीबीएस पास करने वाले युवा प्रैक्टिस कर रहे हैं। सरकार भी बांड भरवाकर सस्ती मेडिकल एजुकेशन जिन छात्रों को देती है, बांड की शर्तों के तहत उनसे एमबीबीएस पास होने के बाद पहाड़ में प्रैक्टिस कराती है।
प्रैक्टिस के लिए विशेष परीक्षा का नियम आने के बाद निश्चित तौर पर पहाड़ में चिकित्सकों की कमी और बढ़ेगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लगातार इसका विरोध कर रही है। उनका कहना है कि सरकार जो बिल लाने की तैयारी में है, उसकी शर्तों से चिकित्सकीय पेशे पर जहां संकट आएगा, वहीं भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड जैसे चिकित्सकों की कमी वाले राज्य में एमबीबीएस पर लगने वाले यह बंदिशें और क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट निश्चित तौर पर दुखदायी होगा। इससे पहाड़ में डॉक्टरों की कमी बढ़ेगी, जिसके लिए राज्य सरकार को पहले से इंतजाम करने होंगे। कहीं न कहीं इस तरह के नियम से मेडिकल कालेज और छात्रों के अलावा जनता के लिए भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
- डॉ. जेपी शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए देहरादून
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