फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   make afirens company chairman gloria helps to poor students

सड़क किनारे खानाबदहोश बच्चों को मिली छत, छह दोस्तो ने मिलकर बनाया काबिल

Wed, 05 Sep 2018 08:35 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 05 Sep 2018 08:35 PM IST
विज्ञापन
make afirens company chairman gloria helps to poor students
छह दोस्तों के एक समूह ने उठाया था अनाथालय के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा
विज्ञापन

कितने हैरान होंगे आप, जब सड़क किनारे तंबू गाड़कर रहने वाले बच्चे आपसे अंग्रेजी में बात करने लगें। सुनने में तो यह असंभव-सा ही लगता है, लेकिन इसे संभव कर दिखाया है ‘मेक अडिफरेंस’ नाम की संस्था चलाने वाली और मूलरूप से कोच्चि की रहने वाली ग्लोरिया बेनी ने। कॉलेज लाइफ के दौरान उनका छह दोस्तों का समूह था। एक बार उस समूह में किसी का जन्मदिन आया तो सभी ने शहर के एक अनाथालय में बच्चों के साथ जन्मदिन मनाने का फैसला किया।

ग्लोरिया ने बताया, ‘‘जब हम उस अनाथालय में गए तो हमने वहां देखा कि बच्चे बहुत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उनके प्रतिभा की कदर नहीं हो रही है। हमने अनाथालय के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए एक समूह बनाया और उसका नाम ‘मेक अ डिफरेंस’ रखा। हमने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से शुरुआत की।’’ वक्त बीतता गया और कॉलेज कब खत्म हो गया पता ही नहीं चला।
विज्ञापन

ग्लोरिया को हैदराबाद में गूगल में नौकरी मिल गई।

हालांकि गूगल जैसी संस्था में 5 वर्ष काम करने के बाद भी ग्लोरिया को आत्मसंतुष्टि नहीं मिल पा रही थी। ग्लोरिया कहती हैं, ‘‘मैं गूगल में थी, लेकिन मेरा मन 'मेक अ डिफेरेंस ग्रुप' को लेकर चिंतित रहता था। एक दिन मैंने फैसला कर लिया कि मैं गूगल को छोड़कर अपने ग्रुप को फिर से खड़ा करूंगी।’
विज्ञापन
विज्ञापन


’ वे बताती हैं, ‘‘हमें ऐसे युवा स्वयंसेवकों की जरूरत थी, जो अपना कुछ समय बच्चों को दे सकें। इसके लिए हमने कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं से संपर्क किया।’’ जिस समूह में कभी सिर्फ छह लोग हुआ करते थे, अब उसमें करीब 4,500 स्वयंसेवक हैं। ग्लोरिया बताती हैं, ‘‘हमने 80 बच्चों के साथ शुरुआत की थी, लेकिन अब हम 5,000 बच्चों को पढ़ाते हैं।’
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed