वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 75 फीसदी फीस वसूल सकेंगे निजी शिक्षण संस्थान, अदालत ने दी मंजूरी
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कोरोना महामारी की वजह से पैदा हुई स्थिति के बीच निजी शिक्षण संस्थानों के फीस वसूलने को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए निजी शिक्षण संस्थान 75 फीसदी फीस वसूल सकते हैं। कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के निजी शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए पिछले शैक्षणिक वर्ष में भुगतान की गई ट्यूशन फीस का 75 फीसदी दो किस्तों में लेने की अनुमति दी। यानी की सूबे के निजी शिक्षण संस्थान अब विद्यार्थियों से दो किस्तों में 75 फीसदी ट्यूशन फीस ले सकेंगे।
अदालत का कहना है कि इसमें से 40 फीसदी फीस 31 अगस्त तक या उससे पहले अग्रीम में ली जा सकती है। जबकि बाकी की फीस अगले दो महीने के भीतर ली जा सकती है। यह फीस स्कूलों व निजी शिक्षण संस्थानों के खुलने के दो महीने बाद ली जा सकती है। दरअसल, इस मामले में ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स एशोसिएशन ने अदालत में याचिका डाली थी जिसमें 20 अप्रैल को सरकार द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। सरकार ने अपने आदेश में निजी शिक्षण संस्थानों के फीस वसूलने पर रोक लगा दी थी। इस पूरे मामले में सरकार ने नौ जुलाई को अपना पक्षा रखा था।
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राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि निजी स्कूलों को तीन किस्तों में फीस वसूलने की अनुमति दी गई है। लेकिन जब शुक्रवार को मामला अदालत के सामने सुनवाई के लिए आया तो कार्ट ने स्कूलों को दो किस्तों में फीस वसूलने की अनुमति दी। अदालत ने 40 फीसदी फीस अभी और बाकी की 35 फीसदी फीस स्कूल खुलने के दो महीने के भीतर वसूलने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी कहा है कि इस दौरान टीचिंग और नॉन टीचिंग कर्मचारी वेतन और डीए में किसी तरह के बढ़ोत्तरी करने के लिए दबाव नहीं डालेंगे।
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