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आर्थिक सर्वेक्षण: विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले पास नहीं कर पा रहे योग्यता परीक्षा, रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 31 Jan 2025 08:53 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 31 Jan 2025 08:53 PM IST
सार

Eco Survey: भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) की सफलता दर कम है, जो विदेशों में कमजोर क्लीनिकल प्रशिक्षण को दर्शाता है। महंगी मेडिकल फीस के कारण छात्र विदेश जाते हैं।
 

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Low pass ratio of foreign doctors in India shows poor quality of education abroad: Eco Survey
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

विस्तार

Eco Survey: शुक्रवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक योग्यता परीक्षा में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) का पास प्रतिशत बहुत कम है। यह दर्शाता है कि विदेशों में मिलने वाली मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, खासकर नैदानिक (क्लीनिकल) प्रशिक्षण में कमी देखी जाती है।

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सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया कि विदेशों में मेडिकल पढ़ाई को कम आकर्षक बनाने के लिए कुछ नीतिगत बदलाव किए जाने चाहिए। साथ ही, भारत में मेडिकल शिक्षा की लागत को संतुलित रखना भी जरूरी है, ताकि छात्रों को विदेश जाने की जरूरत न पड़े।

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विदेश जाने की वजह

रिपोर्ट में बताया गया कि अन्य पेशेवर कोर्स की तुलना में मेडिकल शिक्षा की फीस सख्त नियमों के बावजूद बहुत ज्यादा है। निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 48% सीटों के लिए फीस 60 लाख से 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा होती है। इस वजह से हर साल हजारों छात्र चीन, रूस, यूक्रेन, फिलीपींस और बांग्लादेश जैसे देशों में कम लागत पर पढ़ाई करने जाते हैं।

भारत लौटने के बाद चुनौतियां

विदेश से मेडिकल डिग्री लेने वाले छात्रों को भारत में डॉक्टर बनने के लिए कई परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। पहले उन्हें NEET-UG क्लियर करके विदेश में दाखिला लेना पड़ता है। फिर डिग्री पूरी करने के बाद भारत में FMG परीक्षा पास करनी होती है और अंत में 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी पड़ती है।

पिछले कुछ वर्षों में कई विदेशी छात्र मुश्किलों का सामना कर चुके हैं। चीन में कोविड-19 लॉकडाउन और यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण कई भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और वे भारत लौटने को मजबूर हुए।

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योग्यता परीक्षा में कम सफलता दर

FMG परीक्षा में पास होने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम है। 2023 में सिर्फ 16.65% छात्र ही यह परीक्षा पास कर सके। इसका मुख्य कारण विदेशों में कमजोर क्लीनिकल प्रशिक्षण और मेडिकल शिक्षा की निम्न गुणवत्ता है। कई बार इन छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए कानूनी बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है, जिससे न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ा है।

मेडिकल शिक्षा में असमानता

भारत में मेडिकल शिक्षा की उपलब्धता असमान रूप से बंटी हुई है। 51% स्नातक (MBBS) और 49% स्नातकोत्तर (PG) सीटें सिर्फ दक्षिण भारतीय राज्यों में केंद्रित हैं। इसके अलावा, ज्यादातर मेडिकल सुविधाएं और कॉलेज शहरी इलाकों में हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। वर्तमान में, शहरी क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 3.8 गुना ज्यादा है।

विशेषज्ञता के विकल्प

कुछ मेडिकल शाखाओं, जैसे रेडियोलॉजी, त्वचा रोग (डर्मेटोलॉजी), स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी) और कार्डियोलॉजी में ज्यादा सीटें उपलब्ध हैं, जबकि मानसिक स्वास्थ्य (साइकेट्री) और बुजुर्गों की देखभाल (गेरियाट्रिक्स) जैसी आवश्यक विशेषज्ञताओं की अनदेखी हो रही है। यह असंतुलन भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर डाल सकता है।

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