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Lal Bahadur Shastri: लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय, 1965 के भारत-पाक युद्ध में निभाई थी बेहद अमह भूमिका

Wed, 01 Oct 2025 08:08 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 01 Oct 2025 08:08 PM IST
सार

2nd October 2025: लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्तूबर 1904 को मुगलसराय में हुआ। वे स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और 1965 के भारत-पाक युद्ध में देश का मजबूत नेतृत्व किया। उनका नारा "जय जवान, जय किसान" आज भी प्रेरणादायक है।
 

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Lal Bahadur Shastri: India’s Second Prime Minister and the Legacy of “Jai Jawan, Jai Kisan”
Lal Bahadur Shastri - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Lal Bahadur Shastri: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्तूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) में हुआ था। यही कारण है कि हर साल 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी के साथ-साथ शास्त्री जी की जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर उनके जीवन, राजनीतिक करियर, उपलब्धियों और योगदान को याद किया जाता है।

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लाल बहादुर शास्त्री भारतीय राजनीति के एक सादगीपूर्ण और ईमानदार नेता थे। उन्होंने 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे 1961 से 1963 तक देश के गृह मंत्री भी रहे। उनके कार्यकाल के दौरान 1965 का भारत-पाक युद्ध हुआ, जिसमें उनके दृढ़ नेतृत्व और साहसिक फैसलों ने उन्हें देशवासियों के दिलों में अमर कर दिया।
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प्रारंभिक जीवन और परिवार

शास्त्री जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव शिक्षक थे, बाद में राजस्व विभाग में क्लर्क बन गए। उनकी माता का नाम रामदुलारी देवी था। जब शास्त्री जी मात्र डेढ़ वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनके ननिहाल में हुआ। कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े शास्त्री बचपन से ही गंभीर, अनुशासित और मेहनती स्वभाव के थे।
 

कैसे मिली शास्त्री की उपाधि

शास्त्री जी की प्रारंभिक पढ़ाई वाराणसी के हरिश्चंद्र हाई स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की। यहीं से उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली, जो आगे उनके नाम का स्थायी हिस्सा बन गई। वे सरलता, ईमानदारी और विनम्रता के लिए जाने जाते थे।

जेल जाकर भी कम नहीं हुआ देशप्रेम

लाल बहादुर शास्त्री किशोरावस्था से ही स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे। महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन में भाग लिया और जेल भी गए। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार कारावास झेलना पड़ा, लेकिन उनके आत्मविश्वास और देशप्रेम में कभी कमी नहीं आई।

आजादी के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। पहले उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने और फिर केंद्र सरकार में रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य मंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। प्रशासनिक सुधारों और जनता से जुड़ने के उनके तरीके ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया।

प्रधानमंत्री के रूप में योगदान

पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद 9 जून 1964 को शास्त्री जी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनके नेतृत्व ने पूरे देश को एकजुट कर दिया।

प्रसिद्ध नारा - "जय जवान, जय किसान"

शास्त्री जी ने किसानों और सैनिकों की भूमिका को समान रूप से महत्व देते हुए ऐतिहासिक नारा दिया – “जय जवान, जय किसान”। यह नारा आज भी भारतीय समाज में प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि देश की रक्षा सैनिक करते हैं और अन्न किसानों से मिलता है, इसलिए दोनों ही राष्ट्र के आधार स्तंभ हैं।

रहस्यमय परिस्थितियों में हुआ निधन

जनवरी 1966 में भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उसी दौरान, 11 जनवरी 1966 को ताशकंद (अब उज्बेकिस्तान) में उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के कारण आज भी चर्चा और सवालों का विषय बने हुए हैं।

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