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केरल हाईकोर्ट : कॉलेज प्रिंसिपल और एसएफआई नेता की जमानत याचिका खारिज, करना होगा आत्मसमर्पण

Fri, 30 Jun 2023 07:22 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Fri, 30 Jun 2023 07:22 PM IST
सार

Kerala High Court: केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक सहायता प्राप्त कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक नेता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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Kerala High Court dismissed the anticipatory bail petitions of a principal and SFI leader Ordered to surrender
केरल उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

Kerala High Court: केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक सहायता प्राप्त कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक नेता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। जो एक विश्वविद्यालय संघ पार्षद के कथित प्रतिरूपण के संबंध में दायर की गई थी। कोर्ट ने आरोपियों को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने प्रिंसिपल जी जे शैजू और एसएफआई नेता ए विशाख की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए अपराध गंभीर प्रकृति के थे।

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यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर चुनाव में हुई धोखाधड़ी

अदालत ने कहा कि अभियुक्तों द्वारा बेईमानी और धोखाधड़ी वाला आचरण प्रथम दृष्टया प्रतीत हुआ था और हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी। दरअसल मामला 05 दिसंबर, 2022 को तिरुवनंतपुरम के कट्टकडा के क्रिश्चियन कॉलेज में हुए चुनावों से संबंधित है, जहां दो उम्मीदवारों - अनखा ए एस और अरोमल वी एल - को सर्वसम्मति से यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर के पद के लिए चुना गया था। जब कॉलेज से चुने गए यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर का विवरण प्रस्तुत करने का प्रोफार्मा केरल विश्वविद्यालय को प्रस्तुत किया गया, तो उसमें अनाखा के स्थान पर कॉलेज से चुने गए यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर के रूप में विशाख का नाम दिखाया गया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई की गई।

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अदालत ने कहा कि किसी कॉलेज के प्रिंसिपल को कानून के तहत विश्वविद्यालय संघ के प्रतिनिधि के पद पर किसी व्यक्ति को नामित करने का अधिकार नहीं है, भले ही पद इस्तीफे या अन्यथा से खाली हो। जांच के दौरान अदालत ने अपने आदेश में कहा "आरोपी की ओर से बेईमानी और कपटपूर्ण आचरण प्रथम दृष्टया स्पष्ट है, जिस कारण और तरीके से दूसरे आरोपी (विशाख) का नाम निर्वाचित उम्मीदवार के रूप में शामिल किया गया और आसपास की परिस्थितियों को सामने लाना आवश्यक है।" 

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आरोपियों को आत्मसमर्पण का आदेश

आरोपों की प्रकृति और उसके निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने आरोपी को 04 जुलाई या उससे पहले जांच अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि विशाख ने प्रथम दृष्टया अपने हस्ताक्षर किए हैं और प्रोफार्मा पर लगाने के लिए अपनी तस्वीरें दी हैं, जिससे गलत दस्तावेज बनाने में मदद मिली।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए सजा), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। विशाख के खिलाफ एसएफआई की ओर से और शैजू के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

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