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Kerala VC Controversy: राज्यपाल ने श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के वीसी से मांगा नोटिस, जानिए मामला

Tue, 25 Oct 2022 05:46 PM IST
सौरभ पांडे एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडे Updated Tue, 25 Oct 2022 05:46 PM IST
सार

श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के वीसी को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने  कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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Kerala Governor Arif Mohammed Khan issued a show cause notice to VC of Sreenarayanaguru Open University
आरिफ मोहम्मद खान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मंगलवार को श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके पास पद धारण करने का क्या कानूनी अधिकार है, क्योंकि उनकी नियुक्ति कथित तौर पर यूजीसी के मानदंडों के खिलाफ है। बता दें कि उन्हें कारण बताओ नोटिस तब आया है जब  राज्यपाल ने पिछले हफ्ते केरल के नौ अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को अपने-अपने कार्यालय छोड़ने के लिए कहा था।
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राज्यपाल ने 4 नवंबर तक मांगा जवाब

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा 21 अक्तूबर 2022 सोमवार सुबह 11.30 बजे तक कुलपतियों द्वारा अपना इस्तीफा नहीं भेजने के बाद, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 नवंबर तक उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अपने संबंधित कार्यालयों में क्या कानूनी अधिकार जारी रखना है। इसी तरह का एक नोटिस अब श्रीनारायणगुरु ओपन यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ पीएम मुबारक पाशा को भेजा गया है और उनसे 4 नवंबर तक जवाब मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर “यह पाया गया है कि श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के वीसी की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के विपरीत है।
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ये था पूरा मामला

राज्यपाल की ओर से केरल राजभवन द्वारा किए गए एक ट्वीट के अनुसार, नौ कुलपतियों में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नाम भी शामिल हैं। बता दें कि शीर्ष अदालत ने एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजश्री एमएस की नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार, राज्य द्वारा गठित कुलपति सर्च कमेटी को चांसलर को इंजीनियरिंग विज्ञान के क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के बीच में कम से कम तीन उपयुक्त व्यक्तियों के एक पैनल की सिफारिश करनी चाहिए थी। लेकिन इसके बजाय उसने केवल एक ही नाम भेजा। इसलिए उनकी नियुक्ति रद्द की गई है। इस आधार पर राजभवन की ओर से विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को तत्काल प्रभाव से इस्तीफे देने को कहा गया है। 
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उस आदेश के आधार पर राज्यपाल ने कुलपतियों के इस्तीफे की मांग की थी, जिनके नाम केवल नियुक्ति के लिए अनुशंसित थे और साथ ही जिन्हें एक समिति द्वारा चुना गया था, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव सदस्य थे, दोनों को यूजीसी के नियमों का उल्लंघन बताया। 


राज्य सरकार की सिफारिश के आधार पर हुई नियुक्ति

पाशा के मामले में कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति राज्य सरकार की सिफारिश के आधार पर की गई थी, न कि यूजीसी के नियमों में निर्धारित खोज/चयन समिति द्वारा की गई थी।






 
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