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JNU: जेएनयू में सेंटर का नाम बदलकर 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ अमेरिका' किया गया, प्रोफेसरों ने जताई आपत्ति

Sat, 31 May 2025 09:46 AM IST
शिवम गर्ग ललित कौशिक, नई दिल्ली
ललित कौशिक, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 31 May 2025 09:46 AM IST
सार

JNU Name Change Controversy: जेएनयू ने 'सेंटर फॉर कैनेडियन, यूएस एंड लैटिन अमेरिकन स्टडीज' का नाम बदलकर 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ अमेरिका' कर दिया है। नाम परिवर्तन पर प्रोफेसर्स ने नाराजगी जताई, अध्ययन क्षेत्र सीमित होने की चिंता जताई।
 

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JNU: Centre Renamed as 'Centre for the Study of America', Professors Raise Objections; Read Details here
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, JNU - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

JNU America Study Centre Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अमेरिकी नाम की धाक देखने को मिल रही है। जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडी (एसआईएस) के सेंटर फॉर कैनेडियन, यूएस एंड लैटिन अमेरिकन स्टडी का नाम बदलकर सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ अमेरिका कर दिया गया है।

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क्या है पूरा विवाद?

पिछले माह कार्यकारी परिषद की बैठक में नाम में बदलाव को लेकर मंजूरी दी गई थी। इस संबंध में जेएनयू ने अधिसूचना भी जारी की है। इसको लेकर जेएनयू के प्रोफेसर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने फंड में कटौती होने से लेकर अध्ययन क्षेत्र का दायरा सीमित हो जाने पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि लैटिन अमेरिका और कनाडा जो कि अमेरिका से एक विपरीत राजनीतिक चरित्र एवं संस्कृति रखते हैं।

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ऐसे में उनकी एक विशेष पहचान अब खत्म की जा रही है। अमेरिका के वर्चस्व को स्वीकार किया जा रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। बीते मार्च महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को 51वां राज्य बनाने को लेकर जो बात की थी कहीं उस सोच के कारण सेंटर का नाम तो नहीं बदला गया है। इस प्रकार से अमेरिकी राष्ट्रपति विश्व राजनीति में अपना दबदबा बनाने की कोशिश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थायीपन ला रहे हैं जो वैश्विक शांति के लिए खतरा है। ऐसे में जेएनयू का यह निर्णय समझ से परे है।

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क्या खत्म होगा कनाडा और लैटिन अमेरिका पर शोध?

आने वाले समय में जेएनयू के इस निर्णय की वजह से लैटिन अमेरिका और कनाडा संबंधित शोध कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इस संबंध में जेएनयू के एसआईएस के एक अधिकारी ने कहा कि सिर्फ नाम बदला गया है। इसका फंड और शोध क्षेत्र में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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