JNU controversy: काउंटर टेररिज्म कोर्स पर विवाद के बीच नया फैसला, अब 14 अगस्त को मनाया जाएगा यह दिवस
jnu latest controversy 2021: राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय लगातार सुर्खियों में रहता है। हाल ही में शुरू किए गए काउंटर टेररिज्म कोर्स को लेकर चल रहे विवादों के बीच जेएनयू की कार्यकारी परिषद ने एक ऐसा फैसला किया है, जिसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
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राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) लगातार किसी न किसी कारण सुर्खियों में बना रहता है। हाल ही में शुरू किए गए काउंटर टेररिज्म कोर्स (counter terrorism course) को लेकर चल रहे विवादों के बीच जेएनयू की कार्यकारी परिषद (Executive Council of JNU) ने एक ऐसा फैसला किया है, जिसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। जेएनयू के कई छात्र और शिक्षक विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के फैसलाें को लेकर असंतुष्ट हैं और नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कई सवाल भी उठाए हैं।
दरअसल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने गुरुवार, 02 सितंबर, 2021 को एक फैसला करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक वर्ष 06 दिसंबर को बाबा साहब डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस और 14 अगस्त का दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (PARTITION HORRORS REMEMBRANCE DAY) के तौर पर मनाए जाने का निर्णय किया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ के एक दिन पूर्व ही 14 अगस्त का दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित किया था।
Executive Council of JNU approves observance of 14th August each year as 'Partition Horrors Remembrance Day by the university: Jawaharlal Nehru University (JNU) pic.twitter.com/EVpmHzoC6P
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 2, 2021
वैमनस्य और दुर्भावना को खत्म करने वाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा के विषय में लाखों बहनों भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। यह 14 अगस्त का दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।
आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम को लेकर निशाने पर
जेएनयू की ओर से यह फैसला ऐसे समय किया गया जब विश्वविद्यालय प्रशासन पहले से ही अपने आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम को लेकर निशाने पर है। गौरतलब की हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक नए पाठ्यक्रम काउंटर टेररिज्म को शामिल किया है। इसे लेकर छात्र नेताओं और शिक्षक नेताओं ने आपत्ति जताई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस पाठ्यक्रम पर सवाल उठाए हैं।
स्टूडेंट यूनियन और टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध
जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष साकेत मून ने इसे संघ विचारधारा को थोपने वाला बताया है। उन्होंने पाठ्यक्रम में जिहादी हिंसा जैसे शब्दों को शामिल करने पर आपत्ति जताई और इस पाठ्यक्रम को वापस लेने की मांग की है। वही जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने भी इस कोर्स पर आपत्ति जताई है और वापस लेने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि यह पाठ्यक्रम उचित नहीं है। यह हिंदू और मुस्लिम छात्रों के बीच में वैमनस्य की भावना को बढ़ाएगा। यह फैसला अकादमिक से ज्यादा राजनीतिक और प्रोपेगेंडा से प्रेरित है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने किया फैसले का बचाव
हालांकि, इन सब प्रतिक्रियाओं के बीच जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने इस कोर्स का बचाव करते हुए कहा कि इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। पाठ्यक्रम की अकादमिक उपयोगिता को देखे बिना ही उस पर कन्ट्रोवर्सी खड़ी की जा रही है। वहीं, कोर्स को डिजाइन करने वाले जेएनयू के प्रोफेसर अरविंद कुमार ने कहा है कि एक पाठ्यक्रम किसी भी प्रकार से किसी मजहब, संप्रदाय विशेष की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाता है और इसे पूरी तरह अकादमिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है।
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