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JNU: अब भारतीय भाषाओं में भी पढ़ाई करवाएगा जेएनयू; स्पेशल सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज भी होगा स्थापित

Mon, 12 Dec 2022 11:19 PM IST
देवेश शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देवेश शर्मा Updated Mon, 12 Dec 2022 11:19 PM IST
सार

JNU School of Indian Languages: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU, Delhi) अब विदेशी भाषाओं के साथ शैक्षणिक सत्र 2023-24 से भारतीय भाषाओं में भी पढ़ाई करवाएगा। इसके लिए जेएनयू कैंपस में स्पेशल सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज की स्थापना की जाएगी।

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Jawaharlal Nehru University will start a new School of Indian Languages To Celebrate Cultural Diversity
JNU : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

JNU School of Indian Languages: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU, Delhi) की पूर्व छात्रा और पहली महिला कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री डी पंडित ने कहा कि जेएनयू अब विदेशी भाषाओं के साथ शैक्षणिक सत्र 2023-24 से भारतीय भाषाओं में भी पढ़ाई करवाएगा। इसके लिए जेएनयू कैंपस में स्पेशल सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज की स्थापना की जाएगी। फिलहाल तमिलनाडु सरकार ने 10 करोड़ देकर इस सेंटर में तमिल चेयर स्थापित करने की सहमति दे दी है।

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इसके अलावा महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक, पुंडूचेरी, ओडिशा सरकार भी चेयर स्थापित करना चाहती है। कुलपति ने अपने कार्यकाल में चार माध्यमों से 500 करोड़ रुपये एकत्रित करने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि फंड बढ़ाने और सोसायटी की बेहतरी के लिए अगले सत्र से जेएनयू राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत विभिन्न कोर्स में ऑनलाइन सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी शुरू करेगा। इसके लिए बाकायदा एक रोडमैप भी तैयार किया गया है।
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कुलपति ने कहा कि जेएनयू देश ही नहीं, दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय है। यहां देशभर के शहरों से लेकर दूर-दराज के छात्र ही नहीं, विदेशी छात्र भी पढ़ने में इच्छुक रहते हैं। जेएनयू अपने आप में एक ब्रांड है और हमें इसी ब्रांड को आगे बढ़ाने पर काम करना होगा। कुलपति ने माना कि जेएनयू के पास फंड की कमी है और आय के साधन नहीं है। इसीलिए वे मानती हैं कि विश्वविद्यालय को फंड की कमी के लिए अपने स्तर पर काम करना होगा। बल्कि यूं कहें कि जेएनयू अपने आप में इतना सक्षम है कि वह फंड एकत्रित कर सकता है। कुलपति ने कहा कि इसके लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है।

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भारतीय भाषाओं के माध्यम से इतिहास, संस्कृति, साहित्य का प्रचार-प्रसार

कुलपति ने कहा कि जेएनयू में विदेशी भाषाओं के साथ-साथ अब भारतीय भाषाओं की पढ़ाई भी करवाई जाएगी। इसके लिए स्पेशल सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज स्थापित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न राज्य सरकारों से बात चल रही है। फिलहाल तमिलनाडु सरकार ने तमिल चेयर और महाराष्ट्र सरकार ने मराठा चेयर स्थापित करने के लिए 10-10 करोड़ रुपये देने की सहमति दे दी है। जबकि ओडिशा, कर्नाटक, पुंडूचेरी, असम सरकार भी अपनी चेयर स्थापित करेंगे। राज्य फंड देकर अपनी चेयर स्थापित कर सकते हैं।

इसके आधार पर आगे उन भाषाओं, उनके साहित्य, संस्कृति, इतिहास पर पढ़ाई और शोध होंगे। इससे भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने में सफलता मिलेगी। भावी पीढ़ी भी भारतीय भाषाओं से रूबरू होगी। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की तर्ज पर छात्रों को एक -दूसरे राज्यों से भाषा के माध्यम से जुड़ने का मौका मिलेगा। हमारी योजना है कि विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ-साथ हिंदी और उर्दू को भी बढ़ावा देने के लिए विशेष चेयर स्थापित होंगे। इसके लिए हिंदी भाषी और उर्दू भाषी राज्य आगे आकर जेएनयू से जुड़ सकते हैं। इस सेंटर में यूजी, पीजी, पीएचडी से लेकर अन्य कोर्स की भी पढ़ाई होगी।

 

विश्वविद्यालयों को खुद पैसा एकत्रित करना भी जरूरी

प्रोफेसर शांतिश्री डी पंडित कहती हैं कि सरकार के पास हर समय फंड के लिए जाना भी गलत है। जेएनयू के पास पैसे की कमी है, यह सब जानते हैं। इसलिए जेएनयू खुद पैसा एकत्रित करेगा। जेएनयू एक ब्रांड है और हर कोई इस ब्रांड से जुड़ना चाहता है। इसके लिए चार माध्यमों पर काम होगा। मैंने अपने कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये एकत्रित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस पैसे से छात्रों को स्कॉलरशिप, फेलोशिप, जेएनयू के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और शिक्षकों के लिए फैकल्टी डेवलपमेंट पर काम होगा। इसके लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी, एलुमनाई, ऑनलाइन-ऑफलाइन सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्स और इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के माध्यम से पैसा लाने की योजना है। 

 

एलुमनाई अब सीधे पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे

कुलपति ने कहा कि एल्यूमनाई किसी भी संस्थान का सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत हिस्सा होते हैं। इसीलिए आईआईटी की तर्ज पर जेएनयू एल्यूमनाई को जोड़ा जाएगा। इसके लिए एसबीआई बैंक के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करेंगे, ताकि फंड सीधे पोर्टल के माध्यम से खाते में ट्रांसफर हो सकें। एलुमनाई भी अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से फेलोशिप, स्कॉलरशिप या चेयर स्थापित करने के लिए आर्थिक रूप से मदद कर सकते हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस पर अभी तक जवाब नहीं मिला

कुलपति ने कहा कि जेएनयू ने नवंबर में इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा पाने के लिए शिक्षा मंत्रालय को आवेदन भेजा है। हालांकि उस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। हमें उम्मीद है कि जेएनयू को भी इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा मिलेगा। यदि दर्जा मिल जाता है तो फिर करीब 16 सौ करोड़ रुपये मिलेंगे, इससे जेएनयू की वित्तीय सभी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

 

पहली बार ई-लर्निंग स्किल ओरिएंटल कोर्स की पढ़ाई

जेएनयू अभी तक सिर्फ पूरी तरह से स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी की पढ़ाई करवाता है। पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत ई-लर्निंग स्किल ओरिएंटल कोर्स शुरू किए जाएंगे। यह पूरी तरह से डिग्री पढ़ाई के साथ रोजगार, स्टार्टअप, इनोवेशन या अपना बिजनेस शुरू करने में मदद करने वाले होंगे। यह पांरपरिक पढ़ाई से अलग होंगे। जेएनयू कैंपस में इंजीनियरिंग, साइंस, लैंग्वेज, मैनेजमेंट की पढ़ाई करवाई जाती है। इन्हीं विषयों पर आधारित ऑनलाइन-ऑफलाइन सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स होंगे। यह पूरी तरह से प्रोफेशनल कोर्सेस होंगे। इसकी फीस भी प्रोफेशनल कोर्सेस की तर्ज पर होगी। इसका मकसद कोई भी कहीं से भी घर या आफिस से इन कोर्स को करके अपने कौशल विकास को बढ़ा सकता है।

 

जेएनयू को जल्द मिलेगी नई सिक्योरिटी

जेएनयू कैंपस में आए दिन चोरी, मारपीट आदि की घटनाओं को देखते हुए सिक्योरिटी कंपनी को बदलने का फैसला लिया गया था। कुलपति ने कहा कि जेएनयू में नई सिक्योरिटी कंपनी के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नई सिक्योरिटी कंपनी को कैंपस सुरक्षा की जिम्मेदारी दे दी जाएगी। वहीं, सुरक्षा को देखते हुए सीसीटीवी लगाने का फैसला लिया गया है, लेकिन छात्रों और शिक्षकों की सहमति के बाद ही सीसीटीवी लगाए जाएंगे। किसी की भी निजता में दखल देना गलत होगा।

 

अब एनटीए नहीं पीएचडी की परीक्षा खुद लेगा जेएनयू

कुलपति ने कहा कि अगले सत्र से पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय खुद संभालेगा। इस साल पीएचडी दाखिले की प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए ) को सौंपी जा चुकी है, लेकिन अगले शैक्षणिक सत्र पीएचडी दाखिला प्रवेश परीक्षा जेएनयू के पुराने पैटर्न पर विश्वविद्यालय प्रशासन खुद करवाएगा। हालांकि स्नातक प्रोग्राम में दाखिले एनटीए द्वारा आयोजित सीयूईटी यूजी की मेरिट से ही होंगे। उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया होगा।
 

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