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IIT Delhi: अबूधाबी कैंपस में भारतीय छात्रों को जेईई एडवांस से मिलेगा दाखिला, डॉक्टरों के लिए संयुक्त पीएचडी
Fri, 11 Aug 2023 08:04 AM IST
गुलाम अहमद
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Fri, 11 Aug 2023 08:04 AM IST
सार
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि आईआईटी दिल्ली अगले शैक्षणिक सत्र से एक्स दिल्ली के डॉक्टरों के लिए स्नातकोत्तर में मॉस्टर्स ऑफ साइंस फॉर रिसर्च (एमएसआर) शुरू करने जा रहा है।
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आईआईटी दिल्ली
- फोटो : Social Media
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विस्तार
आईआईटी दिल्ली शैक्षणिक सत्र 2024-25 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)2020 की सिफारिशों के तहत नया पाठ्यक्रम लागू करने जा रहा है। एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम का पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है। जबकि बीटेक प्रोग्राम का पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। खास बात यह है कि आईआईटी दिल्ली ने अपने पहले विदेशी कैंपस अबूधाबी में 2024 सत्र से भारतीय छात्रों को जेईई एडवांस की मेरिट और विदेशी छात्रों को यूएई या किसी अन्य नए दाखिला नियम को ईजाद करके सीट देने का फैसला लिया है।
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निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि आईआईटी दिल्ली अगले शैक्षणिक सत्र से एक्स दिल्ली के डॉक्टरों के लिए स्नातकोत्तर में मॉस्टर्स ऑफ साइंस फॉर रिसर्च (एमएसआर) शुरू करने जा रहा है। इसके अलावा अगले साल से आईआईटी दिल्ली के इंजीनियर और एम्स दिल्ली के डॉक्टर मिलकर नए कोर्स में संयुक्त पीएचडी की पढ़ाई भी करेंगे। यह साइंस और इंजीनियरिंग के विषयों पर आधारित होंगे। इसकी घोषणा जल्द की जाएगी।
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इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी प्रोग्राम का पाठ्यक्रम बदला जा रहा है। इसमें मल्टीडिसिप्लनरी, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट समेत एनईपी की अन्य सिफारिशों का लाभ भी मिलेगा। इसका मतलब है कि बीटेक छात्रों के पास भी डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के विकल्प का मौका होगा। इंजीनियरिंग के छात्र साइंस के अलावा ह्यूमैनाइटीज के विषयों को भी अतिरिक्त पढ़ सकते हैं। हमारा मकसद सिर्फ इंजीनियरिंग की डिग्री देना नही है। उन्हें कैंपस से बाहर निकलने से पहले उन्हें स्किल की भी ट्रेनिंग मिलेगी। इसके अलावा रिसर्च, स्टार्टअप या कोई अन्य विकल्प भी यदि वे लेना चाहते हैं तो मौका दिया जाएगा।
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मिस्र के साथ कोर्स शुरू होंगे, पर कैंपस नहीं बनेगा
प्रो. बनर्जी ने कहा मिस्र (इजिप्ट)के साथ कुछ डिग्री कोर्स की पढ़ाई करवाने का फैसला तो लिया है, लेकिन आईआईटी दिल्ली वहां कोई कैंपस स्थापित नहीं करेगी। कई देशों ने अप्रोच तो किया है, लेकिन हमारी प्राथमिकता आईआईटी दिल्ली अबूधाबी कैंपस को शुरू करने की है। हमारा अबूधाबी कैंपस के अलावा किसी अन्य देश में फिलहाल अपना कोई कैंपस स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। आईआईटी दिल्ली का सोनीपत और झज्जर कैंपस बन रहा है। यह कैंपस अगले तीन से चार सालों में शुरू हो जाएगा।
प्रो. बनर्जी ने कहा कि आईआईटी दिल्ली के अबूधाबी कैंपस शैक्षणिक सत्र 2024 से काम करना शुरू कर देगा। अभी दाखिला प्रक्रिया पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। क्योंकि आईआईटी में दाखिले का फैसला आईआईटी काउंसिल करता है। आईआईटी काउंसिल की कमेटी की सिफारिशों और गुणवत्ता से बिना कोई समझौता किये दाखिले होंगे। भारतीय छात्र यदि अबूधाबी कैंपस में दाखिला लेना चाहते होंगे तो उन्हें जेईई एडवांस की मेरिट के आधार पर सीट मिलेगी। इसके अलावा विदेशी छात्रों के लिए यूएई के उच्च शिक्षा नियमों या फिर किसी अन्य प्रक्रिया के आधार पर दाखिला दिया जा सकता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में आईआईटी के ब्रांड और गुणवत्ता से किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं होगा। अबूधाबी कैंपस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, हेल्थ, रिसर्च समेत अन्य विषयों पर काम होगा।
10 सीजीपीए पाने वाली छात्रा होगी सम्मानित
आईआईटी दिल्ली 12 को 54 वां दीक्षांत समारोेह आयोजित करेगा। इसमें क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंसेज विभाग में प्रोफेसर प्रसिद्ध माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग मुख्य अतिथि होंगे। समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी प्रोग्राम के कुल 2350 छात्रों को डिग्री दी जाएंगी। खास बात यह है कि समारोह में पीएचडी की एक छात्रा को 10 में से 10 सीजीपीए लेने पर सम्मानित भी किया जाएगा। निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि दीक्षांत समारोह की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। समारोह में शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पांच एल्युमनाई अवार्ड और दो गोल्ड अवार्ड देकर सम्मानित भी किया जाएगा। इसके अलावा प्रेजीडेंट, डायरेक्टर समेत अन्य अवार्ड भी शामिल हैं।
पेरिस विवि के साथ कैंसर, बॉयोमेडिकल पर रिसर्च
आईआईटी दिल्ली और पेरिस की सोरबोन यूनिवर्सिटी ने रिसर्च और अकेडमिक क्षेत्र में काम करने के लिए समझौता किया है। इसमें दोनों देशों के उच्च शिक्षण संस्थान मिलकर स्वास्थ्य क्षेत्र पर मिलकर काम करेंगे। दोनों उच्च शिक्षण संस्थानों के वैज्ञानिक और छात्र कैंसर, बॉयोमेडिकल, बॉयोटेक्नोलाॅजी, न्यूरोसाइंसेज, इंजीनियरिंग विषयों पर साथ मिलकर शोध करेंगे।
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