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करियर का अनोखा फैसला: 60 अंक, एआईआर 1 और फिर आईआईटी से अलग राह, भौतिकी के लिए सर्वेश ने क्यों चुना टीआईएफआर?
Sat, 03 Oct 2026 04:34 PM IST
शिवम तिवारी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sat, 03 Oct 2026 04:34 PM IST
सार
आईआईटी जैम 2026 में भौतिकी में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले सर्वेश गुप्ता ने आईआईटी के बजाय टीआईएफआर मुंबई का रुख किया। उन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी में एकीकृत पीएचडी कार्यक्रम चुना है। जानिए नेपाल से शुरू हुआ उनका सफर, तैयारी का तरीका और शोध को करियर बनाने की वजह।
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आईआईटी जैम में भौतिकी के नंबर-1 छात्र ने आईआईटी नहीं चुना, शोध के लिए टीआईएफआर का रुख
- फोटो : AI Generated
विस्तार
कई छात्रों के लिए किसी प्रवेश परीक्षा में अखिल भारतीय प्रथम रैंक हासिल करना आईआईटी में दाखिले की ओर बढ़ने का स्वाभाविक कदम माना जाता है। लेकिन सर्वेश गुप्ता ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने आईआईटी जैम 2026 में भौतिकी विषय में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परास्नातक यानी आईआईटी जैम के माध्यम से आईआईटी और अन्य संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के रास्ते खुलते हैं।
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परिणाम देखकर कैसा लगा?
आईआईटी जैम का परिणाम आने पर सर्वेश को अपनी रैंक पर पहले विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने 60 अंक हासिल किए थे और अपने अनुमान के आधार पर उन्हें इससे काफी नीचे रैंक आने की उम्मीद थी। लेकिन परिणाम देखने पर उनकी रैंक अखिल भारतीय स्तर पर पहली थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई का फैसला केवल रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि अपने शोध के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया।
रैंक के बाद चुना अपना रास्ता?
सर्वेश की कहानी इस बात को दिखाती है कि किसी प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करना करियर की पूरी दिशा तय नहीं करता। आईआईटी जैम में प्रथम रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने उस संस्थान को चुना, जहां उन्हें अपने पसंदीदा विषय सैद्धांतिक भौतिकी में आगे बढ़ने और शोध करने का अवसर मिल सके। उनका लक्ष्य स्पष्ट था—भौतिकी को समझना, शोध करना और भविष्य में इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना।
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फिर आईआईटी क्यों नहीं गए?
प्रथम रैंक हासिल करने के बाद भी सर्वेश ने किसी आईआईटी को अपना अगला पड़ाव नहीं बनाया। उन्होंने मुंबई स्थित टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान यानी टीआईएफआर में सैद्धांतिक भौतिकी के एकीकृत पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया है। उनका लक्ष्य सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी बनना और आगे चलकर शोधकर्ता तथा प्रोफेसर के रूप में काम करना है।
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भौतिकी में रुचि कब बनी?
सर्वेश का बचपन नेपाल में बीता। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। कक्षा 10 से 12 के बीच उनकी भौतिकी में रुचि बढ़ने लगी। शुरुआत में उन्हें गणित भी काफी पसंद था, लेकिन धीरे-धीरे भौतिकी और उससे जुड़े सवालों ने उन्हें ज्यादा आकर्षित किया। स्कूल के बाद उन्होंने भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और शोध को करियर के रूप में गंभीरता से देखना शुरू किया।
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शोध में किस विषय की रुचि है?
समय के साथ सर्वेश की रुचि सैद्धांतिक भौतिकी की ओर बढ़ी। खासतौर पर उनकी दिलचस्पी गुरुत्वाकर्षण, ब्रह्मांड विज्ञान और गुरुत्वाकर्षण तरंगों में है। इसके अलावा उन्होंने गणितीय आधार, समय-श्रृंखला विश्लेषण और गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पहचान से जुड़े विषयों पर भी अध्ययन किया है।टीआईएफआर को क्यों चुना?
सैद्धांतिक भौतिकी में शोध के लिए संस्थानों की जानकारी जुटाते समय सर्वेश की नजर बार-बार टीआईएफआर पर गई। बाद में एक प्रतियोगिता जीतने के बाद उन्हें टीआईएफआर की प्रयोगशाला देखने का अवसर मिला। मुंबई परिसर में शोध का वातावरण देखने के बाद उनकी इस संस्थान में रुचि और मजबूत हुई। टीआईएफआर में सैद्धांतिक भौतिकी के साथ खगोल विज्ञान, उच्च ऊर्जा भौतिकी और अन्य क्षेत्रों में भी शोध होता है।जैम की तैयारी कैसे की?
सर्वेश ने परीक्षा की तैयारी के लिए पूरे दिन केवल पढ़ाई करने का तरीका नहीं अपनाया। उन्होंने एक तय दिनचर्या बनाई थी। एक साक्षात्कार के अनुसार, उनके दिन में व्यायाम, व्याख्यान, कॉलेज, सवाल हल करने का अभ्यास और शैक्षणिक वीडियो देखना शामिल था। वह दोस्तों और कमरे के साथियों के साथ बातचीत के लिए भी समय निकालते थे। कठिन सवालों को समझने के लिए वह दोस्तों के साथ चर्चा करते और अलग-अलग तरीकों से उन्हें हल करने का प्रयास करते थे।परिणाम देखकर कैसा लगा?
आईआईटी जैम का परिणाम आने पर सर्वेश को अपनी रैंक पर पहले विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने 60 अंक हासिल किए थे और अपने अनुमान के आधार पर उन्हें इससे काफी नीचे रैंक आने की उम्मीद थी। लेकिन परिणाम देखने पर उनकी रैंक अखिल भारतीय स्तर पर पहली थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई का फैसला केवल रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि अपने शोध के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया।
रैंक के बाद चुना अपना रास्ता?
सर्वेश की कहानी इस बात को दिखाती है कि किसी प्रवेश परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करना करियर की पूरी दिशा तय नहीं करता। आईआईटी जैम में प्रथम रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने उस संस्थान को चुना, जहां उन्हें अपने पसंदीदा विषय सैद्धांतिक भौतिकी में आगे बढ़ने और शोध करने का अवसर मिल सके। उनका लक्ष्य स्पष्ट था—भौतिकी को समझना, शोध करना और भविष्य में इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना।
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