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Google Doodle: कौन है रूडोल्फ वीगल? जिन्हें दो नोबल पुरस्कार नामांकन से किया सम्मानित

Thu, 02 Sep 2021 11:04 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Thu, 02 Sep 2021 11:04 AM IST
सार

एक छोटे से बैक्टीरिया का अध्ययन करने से लेकर हज़ारों लोगों की जान बचाने तक, आपके अथक परिश्रम का दुनिया पर जो प्रभाव पड़ा है, वह आज भी महसूस किया जाता है- हैप्पी बर्थडे, रुडोल्फ वीगल! - गूगल

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Google Doodle celebrates 138th birthday of polish Rudolf weigl
Rudolf weigl - फोटो : Google Doodle

विस्तार

गूगल ने गुरुवार को पोलिश इन्वेंटर, डॉक्टर और इम्यूनोलॉजिस्ट रूडोल्फ वीगल का 138वां जन्मदिन डूडल के साथ मना रहा है। बता दें कि रूडोल्फ वीगल ने सबसे पुराने और सबसे संक्रामक रोगों में से एक - टाइफस के खिलाफ पहली बार प्रभावी टीका तैयार किया था। उनके काम को एक नहीं बल्कि दो नोबेल पुरस्कार नामांकन से सम्मानित किया गया है। गौरतलब है कि रुडोल्फ स्टीफन जान वीगल का जन्म चेक गणराज्य में वर्ष 1883 में हुआ था। उन्होंने 1907 में पोलैंड के ल्वो विश्वविद्यालय से जैविक विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इतना ही नहीं, उन्होंने जूलॉजी, तुलनात्मक शरीर रचना (कम पैरेटिव एनाटॉमी) और ऊतक विज्ञान (हिस्टोलॉजी) जैसे विषयों में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 

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टाइफस ने यूरोप में मचाया कहर, सालों की शोध ने बाद किया वैक्सीन का परीक्षण
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान, टाइफस यूरोप में कहर बरपा रहा था और कुछ ही समय में लाखों लोगों की जान ले चुका था। वीगल ने मामलों को अपने हाथों में लेने और बीमारी पर शोध करने का फैसला किया। उन्होंने पाया कि इसका मूल कारण संक्रमण फैलाने वाली जूँ थी। उन्होंने इसे अपनी प्रयोगशाला में उगाया और वैक्सीन बनाने के लिए उनके पेट को कुचल दिया। 1933 तक, कई वर्षों के संशोधन के बाद टीके का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया।

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बचाई 5000 यहूदियों की जान, स्थापित किया टाइफस वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
नाज़ी यहूदी बस्तियों में लगभग 5000 यहूदियों को बचाने में उनकी भूमिका ने उन्हें इतिहास में एक प्रमुख व्यक्ति बना दिया। जब नाजी जर्मनी ने उसके बारे में सुना, तो उन्होंने वीगल को टाइफस वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाने के लिए कहा। उसके लिए, उसने अपने कई यहूदी सहयोगियों और दोस्तों को काम पर रखा ताकि वे एकाग्रता शिविरों में निर्वासित न हों।इसके अलावा, वह एकाग्रता शिविरों में टीकों की तस्करी करने में भी कामयाब रहे।

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हस्तक्षेप की वजह से मिला नोबेल पुरस्कार
वैक्सीन बनाने और मानवीय कार्यों के लिए वीगल को दो बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, दोनों बार हस्तक्षेप के कारण, वह प्राप्तकर्ता नहीं बन पाया। उन्होंने 1957 में अंतिम सांस ली। हालांकि, 2003 में, इज़राइल ने उन्हें उनके योगदान के लिए 'राष्ट्रों के बीच धर्मी (राइटियस अमौंग द नेशन्स)' की उपाधि से सम्मानित किया।

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