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Hindi News ›   Education ›   English replaced with Urdu for medium of instruction in Pak Punjab Govt schools raised controversy

यहां स्कूलों में अंग्रेजी की जगह उर्दू में दिए जाएंगे निर्देश, छिड़ा विवाद

Mon, 29 Jul 2019 01:17 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 29 Jul 2019 01:17 PM IST
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English replaced with Urdu for medium of instruction in Pak Punjab Govt schools raised controversy
school - फोटो : dawn

स्कूलों में अंग्रेजी की जगह उर्दू भाषा में निर्देश दिए जाने के फैसले ने विवाद छेड़ दिया है। पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने स्कूलों में निर्देश देने के लिए अंग्रेजी भाषा को हटा दिया है। अब यहां के प्राथमिक स्कूलों में सिर्फ उर्दू में ही निर्देश दिए जाएंगे। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि शिक्षक और विद्यार्थी अपना ज्यादातर समय भाषा के अनुवाद में गंवा देते हैं। यह निर्देश मार्च 2020 शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के करीब 60 हजार से ज्यादा स्कूलों में लागू होगा।

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इस फैसले के लिए पंजाब की तहरीक-ए-इंसाफ सरकार, मुख्यमंत्री बुजदार के साथ-साथ प्रधानमंत्री इमरान खान की भई काफी आलोचना की जा रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि यह फैसला हमें वापस स्टोन एज में ले जाएगा। लोग इमरान खान को उनका वो वादा भी याद दिला रहे हैं जिसमें उन्होंने सभी स्कूलों (निजी, सरकारी या अन्य) में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने की बात की थी। 
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पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर के एक प्रोफेसर ने कहा कि 'पाकिस्तान के 72 साल में भी ये साफ नहीं हो पाया है कि हम करना क्या चाहते हैं। अब भी सरकार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के बजाय भाषा बदलने को अपनी नीति बना रही है।'
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पंजाब के सरकारी स्कूलों में पूर्व सरकार (पीएमएल-एन) ने ब्रिटिश काउंसिल और यूके के इंटरनेशनल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की मदद से अंग्रेजी की शुरुआत की थी। लेकिन वर्तमान मुख्य मंत्री उस्मान बुजदार की सरकार ने फैसला पलट कर वापस उर्दू को निर्देशों का माध्यम बनाया है। 


इस संबंध में बुजदार का कहना है कि 'प्रदेश के शिक्षा विभाग ने 22 जिलों में एक सर्वे कराया जिसमें करीब 85 फीसदी लोगों ने उर्दू को वोट दिया। अंग्रेजी एक अलग विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।'

वहीं, पंजाब सरकार का एनरोलमेंट कैंपेन बच्चों को स्कूल तक लाने में असफल साबित हो रहा है। इस संबंध में सरकार का एक अन्य सर्वे कहता है कि अभिभावक अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, सरकारी में नहीं।

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