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Engineers Day 2021 : कौन हैं मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया? जिनके जन्मदिन पर मनाया जाता है यह दिवस

Wed, 15 Sep 2021 01:05 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Wed, 15 Sep 2021 01:05 PM IST
सार

Engineers Day: सर एमवी न केवल एक महान सिविल इंजीनियर थे, बल्कि 1912 से 1919 तक मैसूर के 19वें दीवान के रूप में भी कार्य किया। मैसूर के दीवान के रूप में सेवा करते हुए, 1915 में उन्हें किंग जॉर्ज पंचम द्वारा ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के कमांडर के रूप में 'नाइट' से सम्मानित किया गया था।

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Engineers Day 2021: know the significance, history of this day. Who is M Visvesvaraya?
अभियंता दिवस 2020 - फोटो : Facebook/Ganesh Joshi

विस्तार

प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को, श्रीलंका और तंजानिया के साथ भारत महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की उपलब्धियों को पहचानने और उनका सम्मान करने के लिए राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाता है। यह दिन इंजीनियर्स के महान कार्य का सम्मान करने और उन्हें सुधार व नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।

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इस साल एम विश्वेश्वरैया की 160वीं जयंती है, जिनका जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के मुद्दनहल्ली गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गृहनगर में पूरी की और बाद में मद्रास विश्वविद्यालय से कला स्नातक (बीए) की पढ़ाई करने चले गए। हालांकि, उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद अपना करियर पथ बदल दिया और पुणे के कॉलेज ऑफ़ साइंस में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

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सर एमवी के नाम से लोकप्रिय, विश्वेश्वरैया ने कई जटिल परियोजनाएं शुरू कीं और अपने करियर के दौरान उल्लेखनीय बुनियादी ढांचागत परिणाम दिए। उन्होंने खाद्य आपूर्ति स्तर और भंडारण को उच्चतम स्तर तक बढ़ाने के लिए 1903 में 'ब्लॉक सिस्टम' को पुणे के पास खडकवासला जलाशय में पानी के फ्लडगेट के साथ एक सिंचाई प्रणाली का पेटेंट कराया और स्थापित किया। यह ग्वालियर के तिगरा बांध और मैसूर के कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध में भी स्थापित किया गया था। कृष्णराज सागर को उस समय एशिया में सबसे बड़े जलाशयों में से एक बनाया गया था।

सिंचाई तकनीकों और बाढ़ आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ, सर एमवी न केवल एक महान सिविल इंजीनियर थे, बल्कि 1912 से 1919 तक मैसूर के 19वें दीवान के रूप में भी कार्य किया। मैसूर के दीवान के रूप में सेवा करते हुए, 1915 में उन्हें किंग जॉर्ज पंचम द्वारा ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के कमांडर के रूप में 'नाइट' से सम्मानित किया गया था।

उपलब्धि व सम्मान

  • सर वीएम ने 1903 में खडकवासला जलाशय में पुणे में स्थापित 'ऑटोमैटिक बैरियर वाटर फ्लडगेट्स' को डिजाइन किया था
  • उन्होंने 1917 में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की जिसे यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता है।
  • वह कर्नाटक में कृष्णा राजा सागर बांध परियोजना के मुख्य अभियंता थे।
  • वह उन समिति सदस्यों में से एक थे जिन्होंने 1934 में भारतीय अर्थव्यवस्था की योजना बनाई थी।
  • जनता की भलाई में योगदान करने के लिए उन्हें ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के नाइट कमांडर की उपाधि दी गई।
  • 1955 में,सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को भारत का सर्वोच्च सम्मान, भारत रत्न मिला।
  • वह बांधों में पानी के व्यर्थ प्रवाह को रोकने के लिए ब्लॉक सिस्टम के संस्थापक थे, जिसे पहली बार पुणे में खडकवासला जलाशय में स्थापित किया गया था।
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