10-12वीं परीक्षा में अगले साल एन्क्रिप्टेड पेपर व्यवस्था हो सकती है लागू
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड वर्ष 2019 से 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाओं में एन्क्रिप्टेड (इसको केवल आधिकारिक व्यक्ति या ग्रुप ही पढ़ सकेगा) पेपर व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रहा है। बोर्ड ने इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कंपार्टमेंट की परीक्षाओं से की है। व्यवस्था को लागू करने के लिए बोर्ड स्कूलों का सर्वे भी करेगा। जिससे इस बात का पता चल सके कि किन स्कूलों को संसाधनों की आवश्यकता है। साथ ही बोर्ड एक बैकअप प्लान भी रखेगा, जिससे कि परीक्षा कराने में किसी प्रकार की समस्या न आए।
सीबीएसई सचिव अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि स्कूलों तक प्रश्न पत्र पहुंचाने के लिए अभी तक यही सबसे बेहतर तरीका दिखाई दे रहा है। लिहाजा इसकी शुरुआत कंपार्टमेंट परीक्षाओं से की गई है। यदि यह सफल रहता है तो इसे वर्ष 2019 की परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।
अभी यह देखा जा रहा है कि बोर्ड स्कूलों को संसाधन उपलब्ध कराए (कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट, जीरोक्स मशीन, जनरेटर) या फिर किसी बाहरी एजेंसी के माध्यम से संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। दरअसल, बोर्ड परीक्षाओं के लिए 4500 स्कूलों में परीक्षा सेंटर बनाता है। दोनों कक्षाओं के लिए लाखों की संख्या में बच्चे परीक्षा देते हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर स्कूलों को संसाधन उपलब्ध कराना भी आसान काम नहीं है।
बोर्ड इस बात पर भी विचार कर रहा है कि ऐसे बड़े स्कूल सेंटर के लिए चुने जाएं जो कि अधिक से अधिक बच्चों को संसाधन उपलब्ध करा सकें। स्कूलों को पूर्ण संसाधन उपलब्ध कराने के बाद ही इसे लागू करने के विषय में सोचा जाएगा। पूर्णतया सुरक्षित सिस्टम बनाने के लिए सीबीएसई के डोमेन से ही प्रिंसिपल का आईडी बनाया जाएगा। जिससे कि उसी आईडी के माध्यम से स्कूल प्रिंसिपल पेपर को प्रिंट कराकर परीक्षा करा सकें।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सेंटर सुपरिडेंटेंट व ऑब्जर्वर को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले साल से लागू किया जाए इसके लिए इस साल के अंत तक इसका समाधान निकाल लेंगे। बोर्ड यह भी विचार कर रहा है कि केवल छोटे विषयों के लिए ही एन्क्रिप्टेड पेपर दिए जाएं।
बोर्ड ने एक बार प्रश्न पत्रों के लिए स्कूलों में टैबलेट पर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने की भी सोची थी लेकिन टैबलेट की कीमत अधिक होने के कारण इसे लाखों बच्चों को उपलब्ध कराना मुश्किल काम है। एन्क्रिप्टेड पेपर व्यवस्था के तहत स्कूलों को ईमेल आईडी पर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए जाते हैं, फिर स्कूल उनका प्रिंट आउट लेकर बच्चों को उपलब्ध कराते हैं।
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