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शिक्षा मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति को लेकर प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से मांगे हैं सुझाव
Sun, 23 Aug 2020 07:33 PM IST
Jaya Tripathi
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Jaya Tripathi
Updated Sun, 23 Aug 2020 07:33 PM IST
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन पर स्कूलों के शिक्षकों और प्राधानाध्यापकों से सुझाव मांगे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को ट्वीट में कहा कि एनईपी-2020 को लागू करने में शिक्षकों की अहम भूमिका है। इसलिए देशभर के सभी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से सुझाव मांगने का फैसला किया गया है। इसमें उनसे पूछा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
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बता दें कि देश में स्कूली और उच्च शिक्षा में व्यापक सुधार का रास्ता प्रशस्त करने के लिए सरकार ने पिछले महीने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति बनाई गई थी। इन्हीं सुझावों के आधार पर आगे नेशनल करि करिकुलम फ्रेमवर्क के आधर पर नया पाठ्यक्रम तैयार होगा।
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शिक्षकों से सभी विषयों पर मांगी गई राय
सरकार की स्कूल शिक्षा सचिव अनिता करवाल ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री ओर शिक्षा सचिव को पत्र लिखा है। इसमें लिखा है कि शिक्षकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने को प्रश्नोत्तर के जरिए स्कूली शिक्षा के संबंध में एनईपी के हरेक विषय पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। प्रश्न इस तरह बनाए जा रहे हैं कि शिक्षक उससे अपने आप को जोड़ पाएं। प्रत्येक प्रश्न में एनईपी के पैराग्राफ का संदर्भ दिया गया है ताकि वे अपने सुझाव अपलोड करने के पहले उसे बेहतर तरीके से समझ सकें।
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एनसीईआरटी के विशेषज्ञों की एक टीम सभी सुझावों पर गौर करेगी। सुझाव सीमित शब्दों के प्रारूप में मांगे गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रारूप में उपयोगी सुझाव को शामिल करने के लिए जरूरी लगने पर शिक्षक से निजी तौर पर संपर्क किया जाएगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंस से मांगे गए सुझाव
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इस संबंध में 24 से 31 अगस्त तक सरकारी स्कूलों, निजी स्कूलों या विभिन्न माध्यमिक स्कूल बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के सभी शिक्षकों को सुझाव देने को कहा है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश प्राथमिकता के आधार पर वीडियो कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के व्यापक प्रचार के लिए विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों के वाट्सऐप ग्रुप या एससीईआरटी और डीआईईटी के जरिये संदेश भेज सकते हैं।
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