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Hindi News ›   Education ›   Education Minister reveals children of Myanmar-Bangladeshi refugees studying in Mizoram schools

Refugees: मिजोरम के स्कूलों में पढ़ रहे म्यांमार-बांग्लादेशी शरणार्थियों के बच्चे, शिक्षा मंत्री का खुलासा

Wed, 09 Aug 2023 01:14 PM IST
श्वेता महतो एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता महतो Updated Wed, 09 Aug 2023 01:14 PM IST
सार

 पिछले चार वर्षों में सरकारी स्कूलों में नामांकनमें वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है।
 

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Education Minister reveals children of Myanmar-Bangladeshi refugees studying in Mizoram schools
Lalchhandama Ralte - फोटो : Social Media

विस्तार

मिजोरम के शिक्षा मंत्री लालछंदामा राल्टे ने बताया कि म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थियों और मणिपुर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से विस्थापित लोगों के बच्चे मिजोरम के स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुल 8,119 बच्चों में 6,366 बच्चे म्यांमार, 250 बंग्लादेश और 1,503 बच्चे मणिपुर के हैं। 
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राल्टे ने बताया कि अन्य बच्चों की तरह उन्हें भी मुफ्त में स्कूल यूनीफॉर्म, किताबें और मिड-डे मील दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिजोरम सरकार इन बच्चों को शिक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, 'मिजोरम सरकार दुनिया भर की जो-जनजातियों को एक मानती है। यही सिद्धांत हमारी शिक्षा में भी दिखाई देती है। हमारी सरकार केवल आश्रय नहीं देती बल्कि जरूरतमंदों को शिक्षा भी प्रदान करती है।' 
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि 44 बच्चों ने पिछले साल (2022) दसवीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिसमें से 31 परीक्षा में शामिल हुए थे। इन 31 में से 28 बच्चे  90.32 फीसदी अंकों के साथ परीक्षा में पास किए थे। 
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उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में सरकारी स्कूलों में नामांकनमें वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। 2019-20 शैक्षणिक सत्र में 1,15,005 छात्रों ने दाखिला लिया था, जो कि 2020-21 सत्र में बढ़कर पहले 1,19,133 हुआ और बाद में 1,28,927 छात्रों तक पहुंच गया। 


म्यांमार और बांग्लादेश से हजारों की संख्या में कुकी समुदाय के शरणार्थी मिजोरम में रह रहे हैं। फरवरी में सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार के ज्यादातर नागरिक चीन राज्य से मिजोरम भाग आए। वहीं बांग्लादेश में एक जातीय विद्रोह समूह के खिलाफ सैन्य हमले के बाद फिछले हफ्ते मिजोरम में आश्रय लेनें आ गए। इसी साल मई में मैतेई के साथ जातीय हिंसा भडडकने के बाद मणिपुर से भागे कुकी आईडीपी ने भी मिजोरम में शरण ली है। 
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