फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Education department prepares exclusive talking texts for bed-ridden tribal girl in Kerala

Kerala: केरल की आदिवासी बेटी के लिए शिक्षा विभाग की अनोखी पहल, अब खास बातचीत वाली किताबें बनेंगी उसकी आवाज!

Tue, 25 Feb 2025 02:36 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Tue, 25 Feb 2025 02:36 PM IST
सार

Tribal Girl in Kerala: बिस्तर पर पड़ी आदिवासी लड़की के लिए शिक्षा विभाग ने खास बातचीत वाली किताबें तैयार की है। मीनाक्षी के लिए उसकी अपनी भाषा में 30 ऑडियो विजुअल पाठ तैयार किए हैं।

विज्ञापन
Education department prepares exclusive talking texts for bed-ridden tribal girl in Kerala
Kerala - फोटो : freepik

विस्तार

Kerala: केरल के मलप्पुरम जिले में चोलनाइक्कन जनजाति की एक बिस्तर पर पड़ी लड़की को शिक्षा प्रदान करने के एक नए प्रयास में, सामान्य शिक्षा विभाग के 'समग्र शिक्षा केरल' कार्यक्रम ने जनजाति की अपनी विशिष्ट भाषा में 30 ऑडियो विजुअल पाठ तैयार किए हैं।

विज्ञापन


10 वर्षीय लड़की मीनाक्षी नीलांबुर के पूचप्पारा निवासी मणि की बड़ी बेटी है, जिसकी पिछले महीने की शुरूआत में जंगल में एक जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई थी।
विज्ञापन


अन्य जनजातीय समुदायों के विपरीत, चोलनाइक्कन जंगलों के अंदर रहते हैं और मुख्यधारा के समाज से उनका संबंध सीमित है।

6,168 छात्रों को मिल रही है घर-आधारित शिक्षा

पिता की मृत्यु के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मीनाक्षी के परिवार को वन क्षेत्र से एक गेस्ट हाउस में स्थानांतरित कर दिया है, जहां वे वर्तमान में रह रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


एसएसके की राज्य परियोजना निदेशक सुप्रिया एआर ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मलप्पुरम जिले के कार्यक्रम अधिकारी नियमित रूप से साप्ताहिक दौरे के जरिए आदिवासी लड़की की शिक्षा का जिम्मा उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एसएसके राज्य भर में 6,168 छात्रों को घर-आधारित शिक्षा प्रदान कर रहा है और उनके लिए घर के दौरे के अलावा वर्चुअल कक्षाओं की भी व्यवस्था की जा रही है।

राज्य कार्यक्रम अधिकारी सिंधु एसएस ने बताया कि मीनाक्षी कुछ ही समय में बातचीत के पाठों पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रही है।

उन्होंने कहा कि लड़की सबसे अधिक असुरक्षित थी, क्योंकि अपनी शारीरिक स्थिति के कारण वह कभी घर से बाहर नहीं गई थी।

30 ऑडियो विजुअल पाठ किए गए हैं तैयार

चोलनाइकन अपनी अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जो द्रविड़ परिवार से संबंधित है और मलयालम और कन्नड़ से मिलती-जुलती है। मीनाक्षी के लिए विशेष रूप से इसी भाषा में बोलचाल के पाठ तैयार किए जाते हैं।



मीनाक्षी के लिए तैयार किए गए वाचन ग्रंथों को चोलनाइक्कन में "थंका, बाना, बेल्ली" (चंद्रमा, आकाश और तारा) नाम दिया गया है।

राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, "यह शिक्षा में समावेशिता का केरल मॉडल है।"

मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, "सामान्य शिक्षा विभाग के तहत एसएसके ने दिव्यांग लड़की के लिए उसकी अपनी भाषा में 30 ऑडियो विजुअल पाठ तैयार किए हैं, क्योंकि वह मलयालम नहीं समझती है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed