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DUSU Election 2025: उम्मीदवारों से ₹1 लाख का बॉन्ड भरवाने के नियम पर बवाल, एबीवीपी-एनएसयूआई ने किया विरोध
Sun, 10 Aug 2025 10:57 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 10 Aug 2025 10:57 AM IST
सार
DUSU Election 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 को लेकर उम्मीदवारों से ₹1 लाख का बॉन्ड भरवाने और पोस्टर लगाने पर ₹25,000 जुर्माने जैसे नए नियमों पर छात्र संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। छात्र संगठनों ने इसे छात्र विरोधी और अलोकतांत्रिक करार देते हुए तत्काल वापसी की मांग की है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय, (DU)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
DUSU Election 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डूसू) को लेकर एक लाख रुपये का बॉन्ड भरने और उम्मीदवार के नाम से पोस्टर लगाने पर 25 हजार रुपये के जुर्माने के प्रावधान को लेकर छात्र संगठनों का विरोध शुरू हो गया है। छात्र संगठनों एनएसयूआई च एबीवीपी ने चुनाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों पर आपत्ति जताई है।
जहां एनएसयूआई ने चुनाव लड़ने के लिए एक लाख का बॉन्ड भरवाने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास कहा है वहीं एबीवीपी ने इस प्रावधान को छात्र विरोधी और अलोकतांत्रिक करार दिया है। एनएसयूआई इन निर्देशों के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है।
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जहां एनएसयूआई ने चुनाव लड़ने के लिए एक लाख का बॉन्ड भरवाने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रयास कहा है वहीं एबीवीपी ने इस प्रावधान को छात्र विरोधी और अलोकतांत्रिक करार दिया है। एनएसयूआई इन निर्देशों के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहा है।
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छात्र संगठनों की आपत्ति क्यों?
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी नई एंटी-डीफेसमेंट अधिसूचना की कड़ी निंदा की है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि लिंगदोह समिति ने 5,000 की चुनावी खर्च सीमा तय की है। उम्मीदवारों से एक लाख को जमानत राशि मांगना असांविधानिक है जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है और यह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चुनाव लड़ने से रोक देगा। यदि कोई उम्मीदवार के नाम से नकली पोस्टर लगाता है तो उम्मीदवार को 24 घंटे में उन्हें हटाने के लिए मजबूर करना या 25,000 का जुर्माना और यहां तक कि निलंबन का प्रावधान अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि लिंगदोह समिति उचित प्रक्रिया का प्रावधान करती है न कि स्वतः दंड का।
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पोस्टर और जुर्माना: छात्र संगठनों की चिंता
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय उच्च न्यायालय और एनजीटी के आदेशों की भाषा चुनकर ऐसे प्रावधान थोप रहा है जो कानून और लिंगदोह की सिफारिशों से कहीं आगे हैं और विपक्षी आवाजों को डराने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि प्रशासन चुनाव प्रक्रिया को एबीवीपी के पक्ष में झुकाने का प्रयास कर रहा है। एनएसयूआई लिंगदोह समिति की सिफारिशों और न्यायालय के आदेशों के अनुसार स्वच्छ और निष्पक्ष छात्र चुनावों का समर्थन करती है।एनएसयूआई ने मांग की है कि चुनाव के लिए लिंगदोह समिति और न्यायालय के आदेशों को पूरी तरह और निष्पक्ष रूप से लागू किया जाए। नियमों का हथियार बनाकर सामान्य छात्रों को चुनाव से बाहर ना किया जाए। चुनाव की निगरानी सख्त लेकिन निष्पक्ष तरीके से को जाए।
सभी वर्गों की भागीदारी हो सुनिश्चित
एबीवीपी ने प्रत्येक उम्मीदवार से लाख रुपये का बॉन्ड भरने के प्रावधान को छात्र विरोधी और अलोकतांत्रिक करार देते हुए इसकी निंदा की है। कहा कि यह प्रावधान विशेष रूप से सामान्य एवं आर्थिक रूप से कमजोर तबके के छात्रों को चुनाव लड़ने से रोकने का काम करेगा। एबीवीपी का कहना है कि डूसू छात्रसंघ चुनाव देश की राजनीति को दिशा देने वाला एक प्रमुख मंच है और इसमें सभी वर्षों के छात्रों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। एबीवीपी ने अधिसूचना की तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार से एक लाख रुपये का बॉन्ड भरने का प्रावधान लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। -सार्थक शर्मा, एबीवीपी दिल्ली प्रदेश मंत्री
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