दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने 'ओपन मोड' परीक्षा प्रणाली को बताया भेदभावपूर्ण
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दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष के पोस्ट-ग्रेजुएट और अंडर-ग्रेजुएट परीक्षा को 'ओपन-बुक' मोड में आयोजित कराने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षकों और छात्र निकायों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फैसले को भेदभावपूर्ण बताया है। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने गुरुवार को नोटिफिकेशन के जरिए कहा था कि अगर कोविड-19 की स्थिति एक जुलाई तक सामान्य नहीं हुई तो अंतिम वर्ष के स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं को 'ओपन मोड' प्रणाली के जरिए कराया जाएगा। इस फैसले पर दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने चिंता जताई है।
'ओपन मोड' प्रणाली में विद्यार्थी घर बैठे ही परीक्षा देंगे और उनको प्रश्नों के उत्तर देने के लिए पुस्तकों, नोट्स और अन्य अध्ययन सामग्री से प्रश्नों के जवाब देखने की अनुमति मिल जाएगी। इसलिए इस फैसले को डूटा अनुचित बता रहा है। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय का कहना है कि अगर एक जुलाई तक कोरोना महामारी की वजह से पैदा हुई हालात सामान्य नहीं होते हैं, तो विद्यार्थी वेब पोर्टल से अपने संबंधित पाठ्यक्रम के प्रश्न पत्र डाउनलोड कर दो घंटे के भीतर उसे हल कर पोर्टल पर ही अपलोड कर सकेंगे।
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ऑनलाइन परीक्षा आयोजित कराने की इस प्रणाली की दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने आलोचना की है और इसे अनुचित एवं भेदभावपूर्ण करार दिया है। डूटा ने इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर असहमति व्यक्त की। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं का शेड्यूल जारी हो गया है। यूजी और पीजी के आखिरी साल की परीक्षाएं एक जुलाई से कराई जाएंगी। स्कूल ऑफ ओपल लर्निंग और नॉन कॉलेजिएट वीमेन्स एजुकेशन बोर्ड की परीक्षाओं का आयोजन भी एक जुलाई से ही किया जाएगा। विश्वविद्यालय में परीक्षाओं का आयोजन तीन पालियों में होगा। परीक्षाओं को जल्द खत्म करने के लिए रविवार को भी विद्यार्थी परीक्षा देंगे। परीक्षाओं की अवधि को तीन से दो घंटे का किया गया है।
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