DU: डीयू में सैन्यकर्मियों के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी का नया कोर्स, कार्यकारी परिषद से मिली हरी झंडी
Delhi University: डीयू अब सैन्यकर्मियों को न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई का अवसर देने जा रहा है। सत्र 2025-26 से शुरू होने वाले इस तीन वर्षीय बीएससी पाठ्यक्रम को रेडियोलॉजी विभाग के तहत चलाया जाएगा, जिसमें एक वर्ष की वैकल्पिक इंटर्नशिप भी शामिल होगी।
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DU: दिल्ली विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सैन्यकर्मियों को न्यूक्लियर मेडिसिन की पढ़ाई कराएगा। डीयू बीएससी न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। शुक्रवार को डीयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में इस पाठ्यक्रम को हरी झंडी मिल गई। डीयू के रेडियोलॉजी विभाग की कमेटी ऑफ कोर्सेज ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर सिफारिश की थी। इसके साथ ही कार्यकारी परिषद की बैठक में शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारित करने के नियमों को भी सदस्यों के विरोध के बाद पारित कर दिया गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद की शुक्रवार को 1275वीं बैठक हुई। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कुलपति ने कहा कि आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए भारत सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर चलाया जा रहा है। डीयू भारत सरकार को हर संभव समर्थन और सहयोग प्रदान करेगा। इस का प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल में पारित करने के बाद कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा गया, जहां इसे पारित कर दिया गया।
शून्य काल के दौरान कुलपति प्रो योगेश सिंह ने बैठक में आए प्रश्न की जानकारी देते हुए कहा कि डीयू को दस वर्षों में हीफा (हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी) लोन का केवल दस फीसदी ही वापस लौटाता है। डीयू में हीफा से मिली राशि से नए भवनों और ढांचागत सुविधाओं का निर्माण हो रहा है। वहीं डीयू का दिल्ली स्थित रेलवे अस्पताल के साथ एमओयू हुआ है। इसके तहत डीयू के कर्मचारियों को सीजीएचएस रेट पर वहां इलाज की सुविधा मिल रही है।
आर्मी हॉस्पिटल में होगा पाठ्यक्रम
डीयू दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल में एक नया कोर्स बीएससी न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी शुरू करेगा। तीन साल के पाठ्यक्रम में एक साल की इंटर्नशिप भी होगी। पाठ्यक्रम की समयावधि छह साल रखा गया है, जो 6 सेमेस्टर का होगा। इसे इंडियन आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज से जुड़े उम्मीदवार ही कर सकेंगे। कोर्स का उद्देश्य परमाणु चिकित्सा के चिकित्सकों के साथ मिलकर काम करने और परमाणु चिकित्सा विभाग के दैनिक संचालन में भाग लेने के लिए उपयुक्त ज्ञान और कौशल प्रदान करना है।
इस कोर्स में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी भारतीय सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा में कार्यरत होना चाहिए। उसने 6 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। उसका सेवा रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए। अभ्यर्थियों को केंद्रीय सीबीएसई, आईसीएसई या किसी अन्य मान्यता प्राप्त समकक्ष राज्य बोर्ड परीक्षा द्वारा आयोजित उच्चतर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए, जिसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विषयों में न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण होना चाहिए और अंग्रेजी एक विषय के रूप में होनी चाहिए।
शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करने के नियम पारित
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों और संबंधित कॉलेजों संस्थानों के विभागों में शिक्षकों (सहायक प्रोफेसर) की वरिष्ठता के लिए नियमों को कार्यकारी परिषद ने पास कर दिया है। यदि उम्मीदवार की सभी योग्यताएं समान हैं, तो शिक्षकों की वरिष्ठता आयु-जन्म तिथि के आधार पर निर्धारित की जा सकती है। इस मामले को लेकर डीयू डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. बलराम पाणी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।समिति की विस्तृत रिपोर्ट पर विचार करने के उपरांत यह नियम पारित किए गए हैं। जो शिक्षक उम्र में बड़ा है उसे उस शिक्षक से वरिष्ठ माना जाएगा जो उम्र में छोटा है और यदि उम्र भी समान है, तो वरिष्ठता एपीआई स्कोर के आधार पर निर्धारित की जाएगी। डीयू कार्यकारी परिषद सदस्य अमन कुमार ने बताया कि वरिष्ठता नियमों को लेकर उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने एसओएल के एसएलएम को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई कि इसकी क्वालिटी ठीक नहीं है, और इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए।
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