डीयू: पास होने के नियमों में बदलाव, 2025-26 बैच के छात्रों को क्रेडिट में छूट, शिक्षकों ने उठाए क्या सवाल?
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2025-26 बैच के छात्रों को पदोन्नति के लिए 28 क्रेडिट की अनिवार्यता से एक बार की छूट दी है। शिक्षकों ने फैसले के कारण और समय को लेकर सवाल उठाए हैं।
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के छात्रों के लिए पदोन्नति के नियम में एक बार की छूट दी है। एक साल की पढ़ाई पूरी कर चुके 2025-26 बैच के छात्रों को अब पदोन्नति के लिए 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। यह छूट केवल 2025-26 बैच के लिए लागू होगी। आगे के बैच के छात्रों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय ने कहा है कि पहले जारी अधिसूचनाओं की बाकी सभी शर्तें लागू रहेंगी। यह फैसला सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद लिया गया है।
तीसरे सेमेस्टर में पहुंचने के बाद क्यों बदला नियम?
फैसले के समय को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित छात्र पहले ही तीसरे सेमेस्टर में पहुंच चुके हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ की सचिव और मिरांडा हाउस की एसोसिएट प्रोफेसर आभा देव हबीब ने सवाल किया कि पास होने के मानदंड में बदलाव क्यों किया गया और इसके पीछे किन परिस्थितियों या कठिनाइयों को आधार बनाया गया। उन्होंने कहा कि एक विशेष बैच के लिए पास होने की शर्त में छूट दी गई है, लेकिन इसके कारणों को स्पष्ट नहीं किया गया है।
क्या बड़ी संख्या में छात्रों के कारण लिया गया फैसला?
हबीब ने यह सवाल भी उठाया कि क्या बड़ी संख्या में छात्र तय क्रेडिट हासिल नहीं कर पाए थे, जिसकी वजह से यह बदलाव करना पड़ा। उन्होंने इस फैसले से कुछ छात्रों को चुनिंदा लाभ मिलने की आशंका भी जताई। साथ ही, उन्होंने शैक्षणिक योग्यता से जुड़े नियमों में पहले हुए बदलावों का भी हवाला दिया।
हबीब ने बताया कि तीसरे सेमेस्टर की कक्षाएं 28 जुलाई से शुरू हो गई थीं, जबकि परीक्षा परिणाम अगस्त तक जारी किए जाते रहे। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों के अगले सेमेस्टर में पहुंचने के बाद पदोन्नति के मानदंड में बदलाव क्यों किया गया। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण बताया।
एनईपी के तहत बढ़े पेपरों को लेकर भी सवाल
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ के कोषाध्यक्ष और किरोड़ीमल कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रुद्राशीष चक्रवर्ती ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। वह विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।
चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि अधिसूचना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बढ़े पेपरों को संभालने में कथित कमी को दर्शाती है। उन्होंने एनईपी लागू करने के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस फैसले से राजनीतिक संबंध रखने वाले किसी व्यक्ति को संभावित रूप से लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह उनका आरोप है और विश्वविद्यालय की अधिसूचना में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
विश्वविद्यालय ने छूट की वजह बताई है?
विश्वविद्यालय की अधिसूचना में 2025-26 बैच के लिए 28 क्रेडिट की अनिवार्यता से एक बार की छूट देने की जानकारी दी गई है। हालांकि, अधिसूचना में यह नहीं बताया गया है कि यह छूट किन परिस्थितियों या कारणों के चलते दी गई है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि फैसला केवल 2025-26 बैच पर लागू होगा और बाद के बैच इससे प्रभावित नहीं होंगे।
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