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CUET UG: छह मिनट देरी के कारण सीयूईटी यूजी परीक्षा देने से चूकी छात्रा, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, जानें मामल

Thu, 05 Jun 2025 06:29 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 05 Jun 2025 06:29 PM IST
सार

CUET UG 2025: दिल्ली उच्च न्यायालय ने देरी होने के कारण परीक्षा में शामिल होने से चूकने वाली छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया है। अभ्यर्थी का दावा था कि वह सिर्फ 6 मिनट से चूक गई थी।
 

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Delhi HC refuses to hear plea of CUET UG student who was late for exam by 6 minutes; Read here
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

CUET UG 2025: दिल्ली उच्च न्यायालय ने परीक्षा की "पवित्रता और अनुशासन" को रेखांकित करते हुए संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में छह मिनट की देरी से शामिल होने से चूकने वाली छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया है।

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18 वर्षीय अभ्यर्थी ने दावा किया कि 13 मई को वह परीक्षा केंद्र पर सुबह करीब 8.36 बजे, परीक्षा के निर्धारित समय से छह मिनट बाद पहुंची थी। लेकिन उसे प्रवेश नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ उसकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण प्राधिकरण के सूचना बुलेटिन और एडमिट कार्ड में सीयूईटी यूजी परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले सुबह लगभग 7 बजे केंद्र पर पहुंचने के बहुत स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि गेट लगभग 8.30 बजे बंद हो जाएंगे।
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पीठ ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा के संचालन में ढिलाई से अराजकता पैदा होगी और "परीक्षा में अनुशासन बनाए रखा जाना चाहिए।"

अदालत ने 31 मई को कहा, "सीयूईटी एक महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा है और समय पर परीक्षा हॉल में पहुंचना, समय पर सीट लेना और गेट बंद होने के समय से पहले केंद्र पर पहुंचना, ये सभी परीक्षा प्रणाली के अनुशासन और लोकाचार का हिस्सा हैं, जिनमें ढील नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे समान स्थिति वाले छात्रों के बीच भारी असमानता पैदा हो सकती है।"

पीठ ने उनकी अपील खारिज करते हुए कहा, "किसी को लग सकता है कि यह केवल छह मिनट का मामला था, लेकिन गेट बंद करने के समय के नियम को सख्ती से लागू करने के लिए अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और भेदभाव हस्तक्षेप करने का वैध आधार नहीं है।"

छात्रों के कैरियर पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के प्रति "अत्यंत सचेत" होते हुए न्यायालय ने कहा कि वह ऐसी परीक्षाओं में बनाए रखने के लिए आवश्यक अनुशासन की अनदेखी नहीं कर सकता।


इसमें कहा गया है, "सीयूईटी यूजी परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है, जिसमें देश भर से 13.54 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। यदि अपवाद बनाए जाते हैं और ऐसी परीक्षा में अनुशासन का पालन नहीं किया जाता है, तो परीक्षा का समय पर संचालन, परिणामों की समय पर घोषणा और कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में समय पर प्रवेश सभी खतरे में पड़ सकते हैं और इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। ऐसे मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप कम से कम होना चाहिए।"

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