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दिवाली की छुटि्टयां ऐसे गुजारें बच्चे, स्कूलों ने माता-पिता से लगाई गुहार 

Sun, 27 Oct 2019 07:40 AM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 27 Oct 2019 07:40 AM IST
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creative homework by schools to students in diwali holidays gujrat
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

दिवाली की छुटि्टयां बच्चों के लिए बहुत खास होती है, गुजरात के बच्चों के लिए इसका महत्व ज्यादा होता है। क्योंकि गुजरात में दिवाली के समय तीन हफ्ते कि छुटि्टयां होती है। सभी छुटि्टयों की तरह इन छुटि्टयों में भी बच्चों के सर पर होमवर्क का बोझ होता है, पर इस बार छुटि्टयों को बच्चों के विकास और उन्हें मजबूत इंसान बनाने के लिए स्कूल पूरी कोशिश कर रहें है। इसके लिए बच्चों को रचनात्मक होमवर्क दिए जा रहें है।

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कई स्कूल अभिभावकों को पत्र लिख रहे हैं  कि बच्चों को गांव में धूल में नंगे पैर खेलने दें, ताकि बच्चे जीवन में उठ कर खड़ होने का गुर खीखें। बच्चों को कहा जा रहा है कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, ग्राम पंचायत, वृद्धाश्रम, पुलिस थाने जाकर देखें की वहां पर किस तरह की परेशानी आ रही हैै। 
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सूरत के एक स्कूल ने माता- पिता को पत्र पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि जब स्कूल खुले होते हैं, तब बच्चे लगातार पढ़ाई-लिखाई में व्यस्त होते हैं। छुटि्टयों का वक्त ही ऐसा होता है जिसे बच्चे अभिभावकों के साथ समय बिताते हैं। अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, यह उनका कर्तव्य है। बच्चे पूरे साल एकाग्रता के साथ पढ़ते ही हैं इसलिए छुटि्टयों के दौरान इन्हें दिल खोल कर खेलने-कूदने दें।  बच्चे की अच्छी बातों की सराहना करें और उन्हें प्रोत्साहित करें। बच्चों के शौक-विचारों के बारे में जानें, उनमें नए विचार पैदा करें, उनकी जिज्ञासा बढ़ाने के लिए वह जो सवाल पूछें, उनके जवाब देें।
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होमवर्क दिए जाने पर विद्यार्थी सिर्फ लिख कर लौटा देते हैं, पर विद्यालयों का मानना है कि लिखने की जगह प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जाए तो विद्यार्थियों को मजा आएगा। इसलिए स्कूल कोशिश कर रहे है कि कोई होमवर्क नहीं दिया जाए। बच्चे छुटि्टयों में पौधे लगाए, स्वच्छता, बिजली-पानी की बचत सीखे और परिवार का प्यार पाए।

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