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Hindi News ›   Education ›   Controversy Erupts Over DU Admission Form; Teachers Call Out Bias, Varsity Calls it a Mistake

DU Admission: डीयू पर सांप्रदायिक-जातिगत पूर्वाग्रह फैलाने का आरोप, विश्वविद्यालय ने कहा- अनजाने में हुई गलती

Tue, 24 Jun 2025 09:02 AM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 24 Jun 2025 09:02 AM IST
सार

DU Admission Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी के यूजी एडमिशन फॉर्म में 'मुस्लिम' को मातृभाषा और 'बिहारी' को भाषा बताने पर शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई। विश्वविद्यालय ने सफाई देते हुए कहा कि अनजाने में गलती हुई।

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Controversy Erupts Over DU Admission Form; Teachers Call Out Bias, Varsity Calls it a Mistake
दिल्ली विश्वविद्यालय, (DU) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

DU Admission Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंडरग्रेजुएट एडमिशन फॉर्म 2025-26 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डीयू टीचर्स एसोसिएशन (DUTA), एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के कई सदस्यों ने फॉर्म में दिखाए गए 'सांप्रदायिक और जातिवादी पूर्वाग्रह' को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

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शिक्षकों के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म में 'मातृभाषा' के विकल्प में 'मुस्लिम' को शामिल किया गया है, जबकि 'उर्दू' जैसी संवैधानिक रूप से मान्य भाषा को नजरअंदाज कर दिया गया। साथ ही, 'बिहारी' को एक भाषा के रूप में दिखाया गया है, जो क्षेत्रीय पूर्वाग्रह को दर्शाता है। फॉर्म में कुछ जातिसूचक शब्द जैसे 'मोची' और 'चमारी' के प्रयोग पर भी तीखी प्रतिक्रिया आई है।

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शिक्षकों की आपत्ति

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के बैनर तले कई प्रोफेसरों ने कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर कहा कि ‘मुस्लिम’ को मातृभाषा के रूप में दिखाना न केवल भ्रामक है, बल्कि एक विशेष समुदाय को सीमित करने का प्रयास है। यह ‘उर्दू’ को एक धर्म से जोड़ने की गलतफहमी फैलाता है।"

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इसके अलावा उन्होंने फॉर्म में सब-कास्ट (उपजाति) से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को भी "गैर जरूरी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन" बताया।

डीयू ने सोशल मीडिया पर जारी की सफाई

डीयू ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि हम डीयू एडमिशन फॉर्म में हुई अनजानी त्रुटि के लिए खेद प्रकट करते हैं। यह पूरी तरह से अनजाने में हुई गलती थी, इसका कोई गलत उद्देश्य नहीं था। कृपया विश्वविद्यालय के समावेशी और सौहार्दपूर्ण वातावरण को दूषित न करें।




हालांकि, शिक्षकों ने डीयू के इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कहा है कि यह केवल एक 'क्लेरिकल मिस्टेक' नहीं हो सकती। उन्होंने मामले की पूरी जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है।

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