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CBSE Answer Sheet Mix Up: सीबीएसई की कॉपियों में गड़बड़ी से मचा हड़कंप, ओएसएम पोर्टल पर पकड़े गए 20 मामले

Fri, 29 May 2026 09:35 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 29 May 2026 09:35 PM IST
सार

सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के करीब 20 मामले सामने आए हैं। कई छात्रों ने शिकायत की कि पोर्टल पर दिखाई गई कॉपी उनकी नहीं थी। करीब 98 लाख कॉपियां स्कैन की गई थीं, जिनमें हजारों में तकनीकी दिक्कत मिली। आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और डीआईसीआई अब सिस्टम की जांच कर रहे हैं।

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CBSE Answer Sheet Mix-up over irregularities in CBSE answer sheets 20 cases detected on OSM portal
CBSE की नई व्यवस्था पर उठे सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम व्यवस्था अब सवालों के घेरे में आ गई है। इस साल पहली बार शुरू हुई इस डिजिटल जांच प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के करीब 20 मामले सामने आए हैं। कई छात्रों ने जब पोर्टल पर अपनी स्कैन कॉपी देखी तो उन्हें पता चला कि दिखाई गई कॉपी उनकी नहीं है। इस खुलासे के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ तो बोर्ड को सफाई देनी पड़ी। अब पूरे सिस्टम की जांच कराई जा रही है।
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आखिर कैसे सामने आया कॉपियों की अदला-बदली का मामला?
सूत्रों के मुताबिक, कक्षा 12 के छात्र वेदांत ने सबसे पहले आरोप लगाया था कि सीबीएसई ने रीवैल्यूएशन प्रक्रिया में जो फिजिक्स की कॉपी अपलोड की, वह उसकी नहीं थी। छात्र ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी तो मामला तेजी से फैल गया। इसके बाद संजना समेत कई अन्य छात्रों ने भी ऐसे ही दावे किए। छात्रों का कहना था कि पोर्टल पर जो उत्तर पुस्तिका दिखाई गई, उसमें लिखावट और जवाब उनके नहीं थे। शिकायतें बढ़ने के बाद सीबीएसई ने संबंधित छात्रों से संपर्क किया और उनकी सही कॉपियां उपलब्ध कराईं। बोर्ड ने इन मामलों को टॉप प्रायोरिटी पर लेने की बात कही।
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ओएसएम प्रक्रिया में कितनी कॉपियां स्कैन की गई थीं?
सूत्रों के अनुसार, इस साल ओएसएम सिस्टम के तहत 98 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं। कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पन्नों की डिजिटल स्कैनिंग हुई। इतनी बड़ी प्रक्रिया के दौरान कई तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं। जानकारी के मुताबिक, लगभग 68 हजार कॉपियों में स्कैनिंग क्वालिटी खराब मिली। इसके बाद इन कॉपियों को दोबारा स्कैन किया गया। हालांकि री-स्कैनिंग के बाद भी करीब 13 हजार कॉपियां तय मानक के मुताबिक साफ और पढ़ने लायक नहीं बन सकीं। ऐसी कॉपियों की जांच बाद में मैन्युअल तरीके से करनी पड़ी।
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मामले के सामने आने के बाद अब तकनीकी स्तर पर पूरे सिस्टम की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी डीआईसीई के विशेषज्ञ इस प्रक्रिया की जांच कर रहे हैं। टीम पोर्टल, स्कैनिंग प्रक्रिया और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम के कोड और तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है ताकि आगे ऐसी गड़बड़ियां न हों। दावा किया गया है कि अगले साल तक पोर्टल को पूरी तरह ग्लिच-फ्री बनाने की कोशिश होगी।

क्या डिजिटल सिस्टम पर फिर भी सीबीएसई भरोसा जता रहा है?
सीबीएसई अधिकारियों ने नई तकनीक का बचाव भी किया है। उनका कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन से पारदर्शिता बढ़ती है और छात्रों को अपनी कॉपी देखने का मौका मिलता है। अधिकारियों के मुताबिक, तकनीक भविष्य है और आने वाले समय में इससे छात्रों को ज्यादा सुविधा मिलेगी। सूत्रों ने बताया कि अगले साल से छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं डिजिलॉकर में भी उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी मार्कशीट के साथ छात्र अपनी स्कैन कॉपी भी देख सकेंगे। बोर्ड का कहना है कि पहली बार किसी नई व्यवस्था को लागू करने में चुनौतियां आती हैं, लेकिन धीरे-धीरे सिस्टम मजबूत होगा।

कॉन्ट्रैक्ट देने को लेकर क्यों उठा विवाद?
ओएसएम प्रक्रिया का ठेका देने को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, तीसरी बार टेंडर जारी होने के बाद दो कंपनियां तकनीकी रूप से योग्य पाई गई थीं। इनमें कोएम्प्ट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस शामिल थीं। वित्तीय बोली में कोएम्प्ट  ने प्रति उत्तर पुस्तिका लगभग 24.75 रुपये का रेट दिया, जबकि टीसीएस ने करीब 65 से 66 रुपये का रेट कोट किया था। इसके बाद कोएम्प्ट को ठेका दिया गया। हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस कंपनी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी अपने पुराने नाम ग्लोबरेना के दौरान भी विवादों में रही है।


विपक्ष ने जांच की मांग क्यों उठाई?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूरे मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील काम का ठेका ऐसी कंपनी को क्यों दिया गया, जिसका पुराना रिकॉर्ड विवादित रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल तकनीकी गलती नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है और छात्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने की है।
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