{"_id":"59ace5fb4f1c1b03278b4ffe","slug":"ugc-invites-suggestions-on-policy-drafted-to-check-plagiarism-in-academic-research","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीटिंग करके बनाई थीसिस तो रद्द हो सकता है रजिस्ट्रेशन, UGC ने बनाई नई नीति ","category":{"title":"Career Plus","title_hn":"करियर प्लस","slug":"career-plus"}}
चीटिंग करके बनाई थीसिस तो रद्द हो सकता है रजिस्ट्रेशन, UGC ने बनाई नई नीति
amarujala.com- Presented by: हर्षिता
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:09 AM IST
विज्ञापन
थीसिस में 60 फीसदी से ज्यादा पकड़ी गई नकल तो रद्द होगा छात्र का पंजीकरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अकादमिक रिसर्च में कदाचार को रोकने के लिए केंद्रीय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मसौदा तैयार किया है। आयोग इस नीति के जरिये एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहता है जिससे शोध पेपर में प्लेजरिज्म यानी नकल पर नकेल कसना आसान हो।
प्रमोशन ऑफ एकैडमिक इंटीग्रिटी एंड प्रिवेंशन ऑफ प्लेजरिज्म इन हायर एडुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशन 2017 नाम से तैयार इस मसौदे में नकल को पकड़ने के लिए तीन स्तर बनाए जाने की बात कही गई है। अगर किसी छात्र की थीसिस पूर्व शोधार्थी से मिलेगी, तो उसकी जांच कर पेपर दोबारा लिखने के निर्देश दिये जाने का प्रावधान है।
पढ़ें: NEET काउंसलिंग की आखिरी तारीख बढ़ी, अब 7 सितंबर तक है मौका
विज्ञापन
नकल रोकने की ये है आयोग की प्लानिंग-
प्लेजरिज्म रोकने के लिए आयोग ने ड्राफ्ट नीति में तीन स्तर का जिक्र किया है-
पहला स्तर: अगर किसी छात्र की थीसिस अन्य शोध पेपर से 10-40 फीसदी तक मिलती है, तो उसे वो भाग निकालकर अपनी सुधार की गई कॉपी छह महीने के भीतर दोबारा जमा करने की मोहलत दी जाएगी।
दूसरा स्तर: अगर किसी छात्र के रिसर्च पेपर में 40 से 60 फीसदी तक नकल पकड़ी जाती है तो उसे सुधार की गई प्रति 18 महीने के भीतर जमा करने का वक्त दिया जाएगा।
तीसरा स्तर: अगर किसी छात्र की थीसिस में 60 फीसदी से ज्यादा नकल पकड़ी गई तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
पढ़ें: साल 2018 तक देश के 800 इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगेगा ताला
मसौदे में संस्थानों द्वारा एकैडमिक मिसकंडक्ट पैनल गठित करने का भी प्रावधान है। यूजीसी ने 30 सितंबर तक लोगों से इस पर सुझाव मांगे हैं। लोग अपना फीडबैक pgmhei.2017@gmail.com पर भेज सकते हैं।
विज्ञापन
प्रमोशन ऑफ एकैडमिक इंटीग्रिटी एंड प्रिवेंशन ऑफ प्लेजरिज्म इन हायर एडुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशन 2017 नाम से तैयार इस मसौदे में नकल को पकड़ने के लिए तीन स्तर बनाए जाने की बात कही गई है। अगर किसी छात्र की थीसिस पूर्व शोधार्थी से मिलेगी, तो उसकी जांच कर पेपर दोबारा लिखने के निर्देश दिये जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन
पढ़ें: NEET काउंसलिंग की आखिरी तारीख बढ़ी, अब 7 सितंबर तक है मौका
विज्ञापन
नकल रोकने की ये है आयोग की प्लानिंग-
प्लेजरिज्म रोकने के लिए आयोग ने ड्राफ्ट नीति में तीन स्तर का जिक्र किया है-
पहला स्तर: अगर किसी छात्र की थीसिस अन्य शोध पेपर से 10-40 फीसदी तक मिलती है, तो उसे वो भाग निकालकर अपनी सुधार की गई कॉपी छह महीने के भीतर दोबारा जमा करने की मोहलत दी जाएगी।
दूसरा स्तर: अगर किसी छात्र के रिसर्च पेपर में 40 से 60 फीसदी तक नकल पकड़ी जाती है तो उसे सुधार की गई प्रति 18 महीने के भीतर जमा करने का वक्त दिया जाएगा।
तीसरा स्तर: अगर किसी छात्र की थीसिस में 60 फीसदी से ज्यादा नकल पकड़ी गई तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
पढ़ें: साल 2018 तक देश के 800 इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगेगा ताला
मसौदे में संस्थानों द्वारा एकैडमिक मिसकंडक्ट पैनल गठित करने का भी प्रावधान है। यूजीसी ने 30 सितंबर तक लोगों से इस पर सुझाव मांगे हैं। लोग अपना फीडबैक pgmhei.2017@gmail.com पर भेज सकते हैं।
कमेंट
कमेंट X