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जीएलए विश्वविद्यालय का अनूठा अभियान- नाटक मंचन द्वारा सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Fri, 27 Oct 2017 01:36 PM IST
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नाटक का एक दृश्य
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जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा के शिक्षा संकाय (बी.एड) के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षुओं ने सामाजिक विषयों के प्रति जागरूकता लाने के लिए व्यंगात्मक लघु नाटकों का मंचन किया। इस नाटक मंचन के माध्यम से प्रशिक्षुओं ने लोगों को सामाजिक बुराईयों का आईना दिखाने का प्रयास किया। प्रशिक्षुओं द्वारा पेश कि गई प्रस्तुतियों की श्रृंखला ने सबको झकझोर कर रख दिया।
इस कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत श्री गणेशीलाल अग्रवाल जी के चित्रपट के समक्ष डॉ. विवेक महरोत्रा एवं डॉ. स्वागत पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। तत्पश्चात बी.एड प्रथम वर्ष के प्रशिक्षुओं ने सामाजिक प्रसंगों में धार्मिक अंधविश्वास जैसी समस्या - दहेज एवं कन्या भ्रूण हत्या, एसिड अटैक, बालयौन उत्पीड़न विषय का चुनाव किया।
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इस कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत श्री गणेशीलाल अग्रवाल जी के चित्रपट के समक्ष डॉ. विवेक महरोत्रा एवं डॉ. स्वागत पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। तत्पश्चात बी.एड प्रथम वर्ष के प्रशिक्षुओं ने सामाजिक प्रसंगों में धार्मिक अंधविश्वास जैसी समस्या - दहेज एवं कन्या भ्रूण हत्या, एसिड अटैक, बालयौन उत्पीड़न विषय का चुनाव किया।
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जीएलए के विद्यार्थी
समस्त बी.एड प्रशिक्षुओं ने पांच टोलियों का विभाजन कर अपनी नाटक प्रतिभा के ज़रिये यह बताया की दहेज एक प्रथा नहीं है, भीख मांगने का है सामाजिक तरीका। बस फर्क इतना है देने वाले की गर्दन झुकी है और लेने वाले की अकड़ बढ़ी है।
लघु नाटकों के मंचन के दौरान बी.एड प्रशिक्षुओं ने सामाजिक आईना दिखाने का प्रयास किया एवं उनके द्वारा दी गयी प्रस्तुतियों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। प्रशिक्षुओं की प्रतिभा को सराहने के लिए मुख्य अतिथि ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान का चयन किया।
कार्यक्रम के समापन पर विभागीय प्राचार्य प्रो कविता वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा की शिक्षा संकाय में हुए नाटकों के माध्यम से लोगों तक सन्देश पहुँचाना है। उन्होंने बताया की समाज में फैली गंदी कुरीतियों के खिलाफ सभी को एक होना होगा तभी दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, एसिड अटैक जैसी बीमारियों को दूर हटाया जा सकता है।
प्रो. कविता ने कहा कि दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या तो एक ऐसी बीमारी कि जड़ पैदा हो गयी जो कि कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती।
लघु नाटकों के मंचन के दौरान बी.एड प्रशिक्षुओं ने सामाजिक आईना दिखाने का प्रयास किया एवं उनके द्वारा दी गयी प्रस्तुतियों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। प्रशिक्षुओं की प्रतिभा को सराहने के लिए मुख्य अतिथि ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान का चयन किया।
कार्यक्रम के समापन पर विभागीय प्राचार्य प्रो कविता वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा की शिक्षा संकाय में हुए नाटकों के माध्यम से लोगों तक सन्देश पहुँचाना है। उन्होंने बताया की समाज में फैली गंदी कुरीतियों के खिलाफ सभी को एक होना होगा तभी दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, एसिड अटैक जैसी बीमारियों को दूर हटाया जा सकता है।
प्रो. कविता ने कहा कि दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या तो एक ऐसी बीमारी कि जड़ पैदा हो गयी जो कि कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती।
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