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Hindi News ›   Education ›   Career Guide: Why Psychometric Tests Are Key After Class 10 & 12 to Make the Right Choices

Tips: 10वीं-12वीं हो या कोई और पड़ाव..., करिअर मार्गदर्शन और साइकोमेट्रिक टेस्ट करेगा सही निर्णय लेने में मदद

Sat, 25 Oct 2025 09:29 AM IST
आकाश कुमार जितेंद्र सिंह, शिक्षा सलाहकार
जितेंद्र सिंह, शिक्षा सलाहकार Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 25 Oct 2025 09:29 AM IST
सार

Career Tips: कई शोध बताते हैं कि 85 फीसदी से अधिक छात्र उचित मार्गदर्शन के अभाव में सही विषय या करिअर विकल्प चुन ही नहीं पाते। ऐसे में, विद्यार्थियों को सही राह दिखाने व अभिभावकों को उलझनों से बचाने के लिए कॅरिअर मार्गदर्शन और साइकोमेट्रिक टेस्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
 

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Career Guide: Why Psychometric Tests Are Key After Class 10 & 12 to Make the Right Choices
Career Tips (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

विस्तार

Career Tips: भारत में अधिकांश विद्यार्थियों के लिए दसवीं कक्षा एक ऐसा मोड़ होती है, जहां से उनके भविष्य की असली दिशा तय होती है। इसके बाद उन्हें अपनी रुचि, योग्यता और आगे की पढ़ाई के अनुरूप विषयों का चयन करना होता है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बारहवीं के बाद आता है, जब स्नातक स्तर पर करिअर की नींव रखने वाला कोर्स चुनना पड़ता है। 

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हालांकि, कई शोध बताते हैं कि 85 फीसदी से अधिक छात्र उचित मार्गदर्शन के अभाव में सही विषय या करिअर विकल्प चुन ही नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि उनका सपना आकार लेने से पहले ही टूटने लगता है। सही मार्गदर्शन की कमी जैसी समस्या केवल छात्रों के साथ ही नहीं होती, बल्कि उनके अभिभावक भी इससे जूझते हुए देखे जा सकते हैं। 
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ऐसे में, विद्यार्थियों को सही राह दिखाने व अभिभावकों को उलझनों से बचाने के लिए करिअर मार्गदर्शन और साइकोमेट्रिक टेस्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

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खुद को गहराई से समझने का जरिया

साइकोमेट्रिक टेस्ट व करिअर गाइडेंस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए छात्रों को खुद को गहराई से समझने का मौका मिलता है। साथ ही, उन्हें अपनी रुचियों और जुनून को पहचानने में भी मदद मिलती है और वे अपने मनपसंद करिअर का चयन आसानी से कर पाते हैं। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने में इससे मदद मिलती है। 

इसके अलावा, साइकोमेट्रिक टेस्ट छात्र के व्यक्तित्व, योग्यता और कौशल का सटीक आकलन करते हैं और उनकी प्रबंधन क्षमता, रचनात्मकता या विश्लेषणात्मकता के आधार पर बेहतर सुझाव देते हैं। इसकी मदद से उन्हें ऐसे स्ट्रीम/विषयों का चुनाव करने में मार्गदर्शन मिलता है, जो उनकी अंतर्निहित क्षमताओं के अनुरूप होते हैं।

अंधी दौड़ के जाल से बचाव

गाइडेंस काउंसलर टेक्नोलॉजी और बाजार की मांग के अनुरूप नए-नए करिअर विकल्प-जैसे यूएक्स/यूआई डिजाइन, एथिकल हैकिंग, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, एआई व मशीन लर्निंग आदि की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। काउंसलर के मार्गदर्शन से छात्र पारंपरिक कॅरिअर की अंधी दौड़ से हटकर अन्य उपलब्ध बेहतर विकल्पों की व्यापकता को देख पाते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से बचने में मदद मिलती है।

मार्गदर्शन से छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि वांछित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कौन-सी परीक्षाएं, कोर्स और कौशल जरूरी हैं। इससे उन्हें एक स्पष्ट शैक्षणिक योजना बनाने में सहूलियत होती है।

मानसिक और भावनात्मक लाभ

जब छात्र अपनी रुचि और क्षमताओं के अनुरूप करिअर चुनते हैं, तो वे अधिक प्रेरित महसूस करते हैं, काम में बेहतर प्रदर्शन करते हैं और दीर्घकालिक संतुष्टि प्राप्त करते हैं। सही चुनाव से भविष्य की अनिश्चितता और सामाजिक/अभिभावकीय दबाव भी कम होता है, जिससे छात्र वर्तमान अध्ययन पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इन सबसे हटकर वे अपनी ताकतों और कमजोरियों को जान पाते हैं और गलत रास्ता अख्तियार करने से बचते हैं, ताकि बाद में पछताना न पड़े।

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