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BAMU University: मराठवाड़ा विश्वविद्यालय करेगा मवेशियों और बकरियों का जिनोम विश्लेषण, मूल नस्लों को बचाने की पहल

Fri, 11 Feb 2022 04:32 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Fri, 11 Feb 2022 04:32 PM IST
सार

BAMU University: इस परियोजना की शुरुआत औरंगाबाद के डिवीजनल कमीश्नर ऑफिस की ओर से की गई है। चार साल में इसके लिए 1.69 करोड़ की राशि भी जारी की गई है।

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BAMU University zoology department undertakes genomic analysis of native cattle breeds
BAMU University - फोटो : www.bamu.ac.in

विस्तार

BAMU University: बाबा साहब भीम राव आम्बेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (BAMU) के जंतू विज्ञान विभाग (zoology department) ने इस क्षेत्र के मूल मवेशियों और बकरियों की नस्लों के जिनोम विश्लेषण (Genome Analysis) की एक परियोजना शुरू की है। इसका मकसद उनकी विशेषताओं का पता लगाना है। 

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Genomic Analysis : मूल नस्लों को बचाने की पहल
इस परियोजना की शुरुआत औरंगाबाद के डिवीजनल कमीश्नर ऑफिस की ओर से की गई है। चार साल में इसके लिए 1.69 करोड़ की राशि भी जारी की गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारी के अनुसार इस परियोजना के तहत लाल कंधारी गाय, देवनी बैल और उस्मानाबादी बकरी के मूल नस्लों पर जांच की जाएगी। इससे उनकी विशेषताओं का पता लगाया जाएगा। ताकि उनका संरक्षण किया जा सके। 
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Genomic Analysis : 650 और 250 सालों का इतिहास
विश्वविद्यालय के जंतू विज्ञान विभाग के प्रमुख गुलाब खेड़कर ने बताया कि लाल कंधारी गाय, देवनी बैल और उस्मानाबादी बकरी लंबे समय से इस क्षेत्र के लोगों को आर्थिक मदद दे रही है। कंधारी गाय और देवनी बैल का 650 और 250 सालों का इतिहास है। हालांकि, समय के साथ ही इनकी मूल विशेषताओं में परिवर्तन आया है। इनके दुग्ध उत्पादकता और रंजकता में बदलाव देखा गया है। इन मूल नस्लों का जीनोम विश्लेषण कर के सैंपल को इकट्ठा किया जाएगा और इनपर अध्ययन होगा। हम मराठवाड़ा क्षेत्र में इन मूल नस्लों को बचाने में सक्षम होंगे। 

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