ओडीएल एडमिशन पर रोक : अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने यूजीसी के आदेश को मद्रास हाईकोर्ट में दी चुनौती
ODL Admission : विश्वविद्यालय की ओर से मद्रास उच्च न्यायालय में दायर की गई रिट याचिका में प्रार्थना की गई है कि यूजीसी को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए विश्वविद्यालय को मुक्त और दूरस्थ शिक्षा यानी ओडीएल पाठ्यक्रमों की मान्यता बहाल करने का निर्देश दिया जाए
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तमिलनाडु के अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के आदेश को चुनौती दी है। अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख करते हुए यूजीसी द्वारा ओडीएल पाठ्यक्रमों में दाखिलों पर रोक लगाने के आदेश को चुनौती दी है। विश्वविद्यालय की रिट याचिका में इस साल 25 और 30 मार्च को यूजीसी की ओर से जारी उस सार्वजनिक अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें कहा गया था कि अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक वर्ष 2014-15 से यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं की है, इसलिए उसे किसी भी कार्यक्रम में किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं देना चाहिए।
वहीं, अन्नामलाई विश्वविद्यालय की ओर से मद्रास उच्च न्यायालय में दायर की गई रिट याचिका में प्रार्थना की गई है कि यूजीसी को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए विश्वविद्यालय को मुक्त और दूरस्थ शिक्षा यानी ओडीएल पाठ्यक्रमों की मान्यता बहाल करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में अंतरिम आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है कि हाईकोर्ट यूजीसी के मार्च 2022 के नोटिस पर रोक लगाते हुए यूजीसी को निर्देश दे कि वह याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय को सत्र 2022-23 से मुक्त और दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों के तहत छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति प्रदान करे।
गर्मी की छुटि्टयों के बाद होगी सुनवाई
जब यह मामला छह मई को जस्टिस आर महादेवन के सामने आया, तो विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि समय-समय पर इस मामले को केवल अंतरिम आदेश पारित करके विचार किया जा रहा था और छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी प्रवेश इस रिट याचिका के परिणाम के अधीन थे। अदालत ने इस दलील को रिकॉर्ड में लिया और मामले को गर्मी की छुट्टी के तुरंत बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
विश्वविद्यालय का दावा यूजीसी ने यथास्थिति बनाए रखी थी
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय ने हर साल मान्यता के लिए आवेदन किया था और यूजीसी ने यथास्थिति बनाए रखी थी, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि 2015 में एक रिट अपील पर एक अंतरिम आदेश पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय द्वारा क्षेत्र के बाहर स्थित केंद्रों के लिए दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के संबंध में दिए गए सभी प्रवेश अधिकार क्षेत्र, लंबित अपील के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। विश्वविद्यालय ने बताया कि यूजीसी की सार्वजनिक सूचना विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को खराब कर रही है और उन छात्रों के लिए भय पैदा कर रही है, जो मामला लंबित होने के कारण पढ़ाई कर रहे थे।
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