फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Agricultural Education: Children from class 6th to 8th will learn farming, teachers are being trained

Agricultural Education: छठी से 8वीं तक के बच्चे सीखेंगे खेती-किसानी, शिक्षकों को दी जा रही ट्रेनिंग

Tue, 27 Aug 2024 08:48 AM IST
मेघा झा हिमांशु मिश्र
हिमांशु मिश्र Published by: मेघा झा Updated Tue, 27 Aug 2024 08:48 AM IST
सार

ICAR: छठी से 8वीं तक के बच्चे सीखेंगे खेती-किसानी, ICAR के वैज्ञानिकों ने तैयार की पुस्तक, शिक्षकों को दी जा रही ट्रेनिंग

विज्ञापन
Agricultural Education: Children from class 6th to 8th will learn farming, teachers are being trained
कृषि शिक्षा पर जोर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ICAR: कॉन्वेंट हो या सरकारी स्कूल, अब छठी कक्षा से 8वीं तक के बच्चे कृषि का पाठ पढ़ेंगे। बच्चों को बताया जाएगा कि जो फल या सब्जियां वे खाते हैं, उसे उगाया कैसे जाता है? दूध कैसे और कहां से आता है...ऐसे तमाम सवालों का न सिर्फ बच्चों को जवाब दिया जाएगा, बल्कि प्रयोग करके दिखाया भी जाएगा। बच्चे भी खुद से मनपसंद का पौधा लगाएंगे और खेती की पूरी प्रक्रिया समझेंगे।
विज्ञापन


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने स्कूली बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए पुस्तक भी तैयार की है। तीनों कक्षाओं के लिए अलग-अलग पुस्तक है। इसमें कृषि की प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी हर जानकारी है। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने बताया कि खेती-किसानी को लोग हेय दृष्टि से देखते हैं। किसान भी नहीं चाहते कि उनके बच्चे खेती करें। इसी धारणा को बदलने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विज्ञापन


डॉ. हिमांशु पाठक का कहना है कि आधुनिक तौर-तरीके से खेती करें तो इससे अच्छा और फायदेमंद पेशा कोई दूसरा नहीं मिलेगा। कृषि शिक्षा खेती-किसानी तक सीमित नहीं रख सकते। इसमें व्यापक संभावनाएं हैं। स्टार्टअप्स से लेकर खाद्य प्रसंस्कृत कंपनियों और शिक्षण संस्थानों तक। हर जगह कृषि के जानकारों की जरूरत होती है। इसीलिए कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


खेतों तक जाएंगे बच्चे, पशुपालन भी सीखेंगे
आईसीएआर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (कृषि शिक्षा) डॉ. आरसी अग्रवाल ने बताया कि तैयार पुस्तकों में कृषि की सभी ब्रांच से जुड़ी सामान्य जानकारी देने की कोशिश हुई है। पशुपालन, जंगल, फलों और सब्जियों से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में भी बताया गया है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, बच्चों को किताबी शिक्षा ही नहीं दी जाएगी, बल्कि खेतों तक लाया जाएगा। उन्हें विभिन्न फसलों की खेती दिखाई जाएगी। पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। आधुनिक तौर-तरीकों से भी रूबरू कराया जाएगा। वे पशुपालन, मुर्गीपालन भी सीखेंगे।

चार फायदे होंगे
  • बच्चों को फलों, फसलों और सब्जियों की सामान्य जानकारी मिल पाएगी।
  • खेती और किसानों को लेकर आने वाली पीढ़ी का नजरिया बदलेगा।
  • रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
  • हर क्षेत्र के लोग कृषि से जुड़ेंगे तो नवाचार बढ़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed