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KIIT: केआईआईटी में नेपाली छात्र की मौत पर बवाल, ओडिशा सरकार ने कड़ी कार्रवाई का दिया आश्वासन

Sat, 22 Feb 2025 07:32 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 22 Feb 2025 07:32 PM IST
सार

KIIT Suicide Case: ओडिशा सरकार की ओर से कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में नेपाली छात्रा की संदिग्ध मौत और नेपाली छात्रों पर हुए कथित हमलों की जांच की बात कही गई। इसके साथ ही यह भी कह गया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
 

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Action to be taken against those involved in death of Nepalese student on KIIT campus: Odisha govt
KIIT - फोटो : PTI

विस्तार

Nepali Student Death: ओडिशा सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) में नेपाली छात्रा की संदिग्ध मौत और नेपाल से आए छात्रों पर हुए कथित हमलों के दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। इस घटना को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताई और संस्थान के संस्थापक अच्युत सामंत की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन

कांग्रेस की युवा शाखा और छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने केआईआईटी परिसर के मुख्य द्वार के सामने एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। उन्होंने संस्थान के संस्थापक अच्युत सामंत के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला जलाया। प्रदर्शन के दौरान, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबरन केआईआईटी परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की, तो सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी झड़प हो गई।

यह विरोध तब हुआ जब कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। कांग्रेस का आरोप है कि 20 वर्षीय नेपाली छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अन्य नेपाली छात्रों को भी संस्थान में निशाना बनाया गया।

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सरकार निष्पक्ष जांच का कर रही इंतजार

ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि केआईआईटी के संस्थापक अच्युत सामंत समेत आठ वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी पैनल के सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज कराया है। इसके अलावा, संस्थान के बाउंसर, सुरक्षा गार्ड और अन्य अधिकारियों सहित 10 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।

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पुलिस जांच और साइबर विश्लेषण

मंत्री ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। वहीं, छात्रा की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मृतक छात्रा को प्रताड़ित करने में उसका क्या रोल था।

इसके अलावा, पुलिस ने इस मामले में वायरल हुए ऑडियो क्लिप को भी जांच के लिए वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफ टेस्ट के लिए भेजा है। यदि ऑडियो क्लिप में आरोपी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया जाएगा।

केआईआईटी में नस्लीय भेदभाव का आरोप

ओडिशा के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिजय पटनायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि केआईआईटी प्रशासन ने नेपाली छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद केवल नेपाली छात्रों को जबरन परिसर से बाहर कर दिया गया, जबकि अन्य छात्रों को छोड़ दिया गया।

पटनायक ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान के कर्मचारियों ने नेपाल के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जो भारत के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाला देश है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और केंद्र सरकार इस मामले पर चुप क्यों हैं?

कड़ी कार्रवाई की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि यूजीसी को केआईआईटी को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए और स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि संस्थान का "डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी" का दर्जा नस्लीय भेदभाव के कारण क्यों न रद्द कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि केआईआईटी में हुई इस घटना से ओडिशा की छवि खराब हुई है, और अब विदेशी छात्र व उनके अभिभावक ओडिशा में पढ़ाई के लिए अपने बच्चों को भेजने से पहले कई बार सोचेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशी छात्रों की शिकायतों के लिए राज्यपाल के घर में एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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