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Samarkand University: तेजी से बढ़ी समरकंद विश्वविद्यालय से MBBS करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या, ये रही वजह
Sun, 10 Dec 2023 03:29 PM IST
आकाश कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकाश कुमार
Updated Sun, 10 Dec 2023 03:29 PM IST
सार
Samarkand University: युद्ध के कारण एमबीबीएस करने के इच्छुक भारतीय उम्मीदवारों के लिए यूक्रेन के दरवाजे बंद हो गए थे। इससे समसकंद जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है।
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Samarkand University
- फोटो : Social Media
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विस्तार
Samarkand University: रूस-यूक्रेन का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा, लेकिन इसके साथ इस युद्ध का असर मेडिकल क्षेत्र की पढ़ाई पर भी पड़ा। युद्ध के कारण एमबीबीएस करने के इच्छुक भारतीय उम्मीदवारों के लिए यूक्रेन के दरवाजे बंद हो गए थे। इसका परिणाम यह हुआ कि उज्बेकिस्तान में 93 साल पुराने समरकंद स्टेट मेडिकल कॉलेज में भारतीय छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखने को मिली।
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2021 तक इस विश्वविद्यालय में लगभग 100 से 150 भारतीय छात्र आते थे। वहीं, 2023 में यह संख्या 3,000 हो गई है। विश्वविद्यालय ने 1,000 से अधिक भारतीय छात्रों को भी समायोजित किया है, जो पहले यूक्रेन के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे थे, लेकिन युद्ध के कारण उन्हें अपने पाठ्यक्रम को बीच में ही छोड़ना पड़ा था।
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स्टेट समरकंद मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ जफर अमीनोव ने बताया, "भारतीय छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है और हम यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था कर रहे हैं कि यह प्रवृत्ति जारी रहे और छात्रों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।"
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अमीनोव ने आगे बताया कि इस साल कॉलेज में 40 से अधिक भारतीय शिक्षकों को काम पर रखा गया है। कॉलेज में शिक्षण का काम केवल अंग्रेजी में होता है, ऐसे में छात्रों की किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "इस तरह, शिक्षक सांस्कृतिक रूप से छात्रों के करीब होते हैं और वे शिक्षक हमें छात्रों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करते हैं।"
भले ही उज्बेकिस्तान में एमबीबीएस की अवधि छह साल हो और भारत में साढ़े पांच साल, लेकिन अंग्रेजी में शिक्षण और सीखना, शांतिपूर्ण माहौल, सस्ती फीस और व्यावहारिक अनुभव ऐसे कारण हैं जो छात्रों को आकर्षित करते हैं।
हर साल लगभग 25,000 भारतीय छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। छात्रों को भारत में अभ्यास करने के लिए एक स्क्रीनिंग टेस्ट, फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (एफएमजीई) को पास करना आवश्यक है।
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