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PwD Reservation: सिर्फ 5% आरक्षण से बदल जाएगी तस्वीर? मनमीत कौर ने गिनाईं दिव्यांग छात्रों की असली जरूरतें

Fri, 21 Aug 2026 07:47 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Fri, 21 Aug 2026 07:47 PM IST
सार

PwD Reservation: डिपार्टमेंट ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज की अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग छात्रों के लिए 5% आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संस्थानों के लिए समावेशी शिक्षा को मजबूत करने का छह सूत्रीय रोडमैप भी बताया।
 

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5% Reservation for Students with Disabilities Must Be Implemented in Higher Education: Govt Official
PwD Reservation - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

PwD Reservation: अशोका यूनिवर्सिटी के ऑफिस ऑफ लर्निंग सपोर्ट (OLS) और इनक्लूसिव यूनिवर्सिटी अलायंस (IUA) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में डिपार्टमेंट ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज (DEPwD) की अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा शामिल हुईं। यहां अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग छात्रों के लिए निर्धारित 5 प्रतिशत आरक्षण को वास्तविक रूप से लागू करने पर जोर दिया।

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उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल नीतियों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ छात्रों को जमीन पर मिलना चाहिए।

समावेशी उच्च शिक्षा के लिए क्या है छह सूत्रीय रोडमैप?

नंदा ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों पर काम करने की जरूरत बताई। इनमें शामिल हैं:

  • संस्थानों में पहुंच और सुविधाओं का ऑडिट।
  • दिव्यांग छात्रों के लिए 5% आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन।
  • जरूरत के अनुसार उचित सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • सहायक तकनीक और सहयोग व्यवस्था को मजबूत करना।
  • शिक्षकों और प्रशासन में संवेदनशीलता बढ़ाना।
  • नियमित पहुंच और सामाजिक ऑडिट के जरिए जवाबदेही तय करना।
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2016 के कानून में भी है 5% आरक्षण का प्रावधान

दिव्यांग छात्रों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2016 में बनाए गए कानून में किया गया था। हालांकि, कुछ संस्थानों में इस कानूनी प्रावधान का पालन नहीं होने को लेकर अदालतों में याचिकाएं भी दायर हुई हैं।

नंदा ने इसी संदर्भ में कहा कि आरक्षण को सिर्फ नीति के तौर पर बनाए रखना पर्याप्त नहीं है। इसे संस्थानों में वास्तविक रूप से लागू करना जरूरी है।

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सिर्फ इमारतें नहीं, वेबसाइट और परीक्षा पोर्टल भी हों सुलभ

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि दिव्यांग छात्रों के लिए पहुंच का मतलब केवल भवनों में रैंप या अन्य भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है।

उच्च शिक्षा संस्थानों की वेबसाइट, ऑनलाइन लर्निंग सिस्टम, परीक्षा पोर्टल और पाठ्यक्रम सामग्री भी दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ होनी चाहिए।

इसका मतलब है कि डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था तैयार करते समय भी दिव्यांग छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा।

छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचे समावेशी शिक्षा

कार्यक्रम में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने भी समावेशी उच्च शिक्षा को महानगरों से आगे ले जाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों, गांवों और उन समुदायों की स्थिति पर भी एक स्टेटस पेपर तैयार किया जाना चाहिए, जो अक्सर इस चर्चा से बाहर रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहरों में नीतियों को समझना आसान हो सकता है, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों की जमीनी स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो दिव्यांग छात्रों और उनके परिवारों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप जमीन पर काम करें।

सहायक तकनीक में एआई का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर

पाठक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर दिव्यांग छात्रों के लिए सहायक समाधान विकसित करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि एआईयू इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अशोका यूनिवर्सिटी के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है।

वहीं, अशोका यूनिवर्सिटी के कुलपति ऋषिकेश टी. कृष्णन ने कहा कि समावेशन को केवल अलग पहल के रूप में नहीं, बल्कि शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत जिम्मेदारी का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए।

कार्यक्रम में नीति निर्माता, उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि और समावेशी शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान ‘Because of You’ नामक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।

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