फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   37 percent students in rural areas 19 percent in urban not studying at all - Survey

कोरोना का कहर: ग्रामीण इलाकों में 37 फीसदी तो शहरी में 19 फीसदी छात्रों की पढ़ाई बंद, हालात चिंताजनक

Tue, 07 Sep 2021 04:52 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Tue, 07 Sep 2021 04:52 PM IST
सार

15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वंचित परिवारों के लगभग 1,400 छात्रों को शामिल करते हुए स्कूल चिल्ड्रन ऑनलाइन और ऑफलाइन लर्निंग (स्कूल) सर्वेक्षण, "लॉक्ड आउट: इमरजेंसी रिपोर्ट ऑन स्कूल एजुकेशन" शीर्षक से किया गया था।

विज्ञापन
37 percent students in rural areas 19 percent in urban not studying at all - Survey
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हाल ही में हुए एक सर्वे में दावा किया गया है कि COVID-19 के कारण देश में लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के बेहद भयावह परिणाम सामने आए हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में 37 प्रतिशत से अधिक छात्र बिल्कुल भी नहीं पढ़ रहे हैं और 48 प्रतिशत कुछ शब्दों से अधिक नहीं पढ़ पा रहे हैं। यह आंकडे़ं 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वंचित परिवारों के लगभग 1,400 छात्रों को शामिल करते हुए किए गए एक सर्वे से सामने आए हैं। स्कूल चिल्ड्रन ऑनलाइन और ऑफलाइन लर्निंग (स्कूल) सर्वेक्षण, "लॉक्ड आउट: इमरजेंसी रिपोर्ट ऑन स्कूल एजुकेशन" शीर्षक से किया गया था। इसे सोमवार को जारी किया गया।

विज्ञापन


इस सर्वेक्षण से कोरोना काल में देश की स्कूली शिक्षा की जो तस्वीर उभरती है वह बिल्कुल निराशाजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण के समय केवल 28 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से पढ़ रहे थे, और 37 प्रतिशत बच्चे बिल्कुल भी नहीं पढ़ रहे थे। एक सिंपल रीडिंग टेस्ट के परिणाम विशेष रूप से चिंताजनक हैं, जिसमें, नमूने में शामिल सभी बच्चों में से लगभग आधे बच्चे कुछ शब्दों से अधिक पढ़ने में असमर्थ थे। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि नियमित रूप से पढ़ने वाले, बिल्कुल भी नहीं पढ़ने वाले और शहरी क्षेत्रों में कुछ शब्दों से अधिक पढ़ने में असमर्थ छात्रों के आंकड़े क्रमशः 47 प्रतिशत, 19 प्रतिशत और 42 प्रतिशत थे। 
विज्ञापन


ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन पढ़ने वालों की संख्या महज आठ फीसदी

स्कूल सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष अपेक्षाकृत वंचित बस्तियों पर केंद्रित हैं, जहां बच्चे आमतौर पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते हैं। महामारी की शुरुआत के बाद से देश भर में स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थान डेढ़ साल से अधिक समय से बंद हैं। COVID-19 स्थिति में उल्लेखनीय सुधार के बाद, कई राज्य सितंबर से चरणबद्ध तरीके से स्कूलों को फिर से खोल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण इलाकों में नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों का अनुपात क्रमश: 24 फीसदी और आठ फीसदी था। सर्वेक्षण में कहा गया है कि पैसे की कमी, खराब कनेक्टिविटी, या स्मार्टफोन तक पहुंच न होना कुछ ऐसे कारण थे, जिनकी वजह से सर्वे सैंपल में शामिल छात्रों के बीच ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बहुत सीमित थी।  

लगभग आधे बच्चों के पास स्मार्टफोन की उपलब्धता नहीं

इसका एक कारण यह है कि सर्वे सैंपल में शामिल कई घरों (ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग आधे) के पास स्मार्टफोन नहीं है। लेकिन यह सिर्फ पहली बाधा है। यहां तक कि स्मार्टफोन वाले घरों में भी, नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों का अनुपात सिर्फ 31 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 प्रतिशत स्मार्टफोन अक्सर कामकाजी वयस्कों द्वारा उपयोग किया जाता है, और स्कूली बच्चों, विशेष रूप से छोटे भाई-बहनों के लिए उपलब्ध हो भी सकता है और नहीं भी (सभी स्कूल सर्वेक्षणों में से केवल 09 प्रतिशत बच्चों के पास अपने स्मार्टफोन थे)। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि वंचित परिवारों में भी, दलित और आदिवासी परिवारों के लिए आंकड़े दूसरों की तुलना में "बहुत खराब" थे, चाहे वह ऑनलाइन शिक्षा, नियमित अध्ययन या पढ़ने की क्षमता हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed