यूथबोल अभियानः 36 फीसदी युवा सेहत के लिए हैं फिक्रमंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेहत के लिए देश के युवा सर्वाधिक फिक्रमंद हैं। नशे की लत में फंसे युवाओं की माने तो जागरूकता की कमी के कारण वे ऐसी लतों का शिकार हो रहे हैं। इस बारे में स्कूल सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें पहले से ही जागरूक किया जाए तो हालात बेहतर हो सकते हैं।
सेंटर फॉर कैटेलाइजिंग चेंज (सी-थ्री) द्वारा आयोजित यूथबोल अभियान के तहत देश के 26 राज्यों के युवाओं ने कुछ इस तरह के ही विचार व्यक्त किए। एक लाख से अधिक युवाओं की आवाज को सांसदों और मंत्रालयों के जरिये बदलाव के लिए कोशिशें जारी है।
नेहरू प्लेस में आयोजित इस कार्यक्रम में सी-3 की कार्यकारी निदेशक डॉ. अपराजिता गोगोई ने इस अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवाओं की संख्या 35 करोड़ से अधिक है। ऐसे में भविष्य निर्धारण में उनकी अहम भूमिका है।
यूथबोल अभियान के जरिये एक लाख से अधिक युवाओं के विचार सामने आए। इस अभियान में 36 फीसदी युवाओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी और पर्यावरण को अहमियत दी। इनमें अधिकतर युवाओं का यही कहना था कि मामूली सुधार के अलावा स्वास्थ्य सेवाएं तो ठीक हैं।
लेकिन जागरूकता के अभाव में वे परेशानियों का सामना करते हैं। युवाओं ने कहा कि अगर उन्हें स्कूलों में नशे से होने वाली परेशानियों और बुरे पहलुओं की जानकारी मिलती तो इसकी गिरफ्त से बहुत पहले बाहर निकल गए होते।
26 फीसदी युवाओं की प्राथमिकता स्कूलों और सामुदायिक स्तर पर सुविधाएं बेहतर करने की रही। इसके तहत 26 फीसदी युवाओं (10-24वर्ष) ने स्कूलों में कंप्यूटर, लाइब्रेरी, प्ले ग्राउंड और स्वच्छ हवा, पानी के साथ स्वच्छता को अधिक महत्ता दी। इस मौके पर सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने सी-थ्री की ओर से की गई इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि इस अभियान के परिणामों को सभी सांसदों को भेजा जाएगा।
डॉ. अपराजिता ने कहा कि पहली बार इस अभियान के जरिये युवाओं के अंदर दबी हुई भावनाओं को बाहर लाया गया है। एक लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी से आए परिणामों को समाज की बेहतरी के लिए लागू करने के प्रयास जारी हैं। इस मौके पर रिपोर्ट भी जारी की गई। कार्यक्रम में आप नेता राघव चड्ढा, डॉ. बुलबुल सूद, डॉ. जीबॉन बैश्य, उसैद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।