फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   19-year-old migrant worker cracks NEET, admitted to Odisha medical college

NEET UG 2025: 19 वर्षीय प्रवासी मजदूर शुभम सबर ने पास की नीट परीक्षा, एमबीबीएस के लिए इस कॉलेज में मिला दाखिला

Sat, 30 Aug 2025 03:42 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 30 Aug 2025 03:42 PM IST
सार

NEET UG Exam 2025: ओडिशा के 19 वर्षीय प्रवासी मजदूर शुभम सबर ने नीट परीक्षा 2025 पास कर एमबीबीएस के लिए कॉलेज में प्रवेश हासिल किया।

विज्ञापन
19-year-old migrant worker cracks NEET, admitted to Odisha medical college
- फोटो : Freepik.com

विस्तार

NEET UG: ओडिशा के 19 वर्षीय छात्र शुभम सबर का डॉक्टर बनने का सपना अब हकीकत बन गया है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बेंगलुरु में मजदूरी करने वाले शुभम ने नीट पीजी परीक्षा में सफलता हासिल की है और अब एक प्रतिष्ठित कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने जा रहे हैं।

विज्ञापन


खुर्दा जिले के बानपुर ब्लॉक के अंतर्गत मुदुलिधिया गांव के एक गरीब परिवार से आने वाले सबर को उस समय बहुत खुशी हुई जब उसके शिक्षक बासुदेव मोहराणा का फोन आया कि उसने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।

विज्ञापन

प्रवासी मजदूर से डॉक्टर बनने तक का सफर

अनुसूचित जनजाति वर्ग में उनकी रैंक 18,212 थी और उन्हें यहां एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दाखिला मिला।

सबर ने पीटीआई-भाषा को बताया, "हाल ही में, बेंगलुरु में एक निर्माण स्थल पर काम करते समय, मेरे शिक्षक का फोन आया और उन्होंने मुझे मिठाई बाँटने के लिए कहा। मैं हैरान रह गया और उनसे कारण पूछा। उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे बताया कि मैंने नीट परीक्षा पास कर ली है। यह मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था। मैं अपने आँसू नहीं रोक सका और अगले दिन उस ठेकेदार की अनुमति से घर लौट आया जिसने मुझे इस काम पर लगाया था।"

अपने तीन महीने के काम के दौरान, छात्र ने 45,000 रुपये कमाए, जिसमें से वह 25,000 रुपये बचा सका।

पुलिस अधिकारी बनना चाहते थे सबर

प्रवासी श्रमिक के रूप में बेंगलुरु तक की यात्रा का कारण पूछे जाने पर सबर ने कहा कि "मेरे पास अपने परिवार का समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।"

उन्होंने कहा, "मैं पांच सदस्यों वाले एक बेहद गरीब परिवार से हूं। जैसे ही नीट परीक्षा खत्म हुई, मैंने अपने परिवार की मदद के लिए कुछ पैसे कमाने का फैसला किया। मैंने एक स्थानीय ठेकेदार से संपर्क किया जिसने मुझे बेंगलुरु भेज दिया। मेरी बचत से मुझे मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया,"  

सबर ने यह भी बताया कि वह शुरू में पुलिस अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उच्च शिक्षा की तैयारी शुरू की तो उनके मन में डॉक्टर बनने की इच्छा जागी।

विज्ञापन

ओडिशा के लोगों की सेवा करेंगे

मेडिकल छात्र ने कहा, "मैं अब डॉक्टर बनने और ओडिशा के लोगों की सेवा करने के अपने सपने को पूरा करने की राह पर हूं।"

उनके माता-पिता - सहदेव और रंगी - को उम्मीद थी कि सरकार उन्हें वित्तीय सहायता देगी ताकि वह अपना पांच वर्षीय एमबीबीएस कोर्स पूरा कर सकें।

शुभम की मां रंगी ने कहा, "बचपन से ही वह बहुत मेहनती और मेधावी रहा है। वह डॉक्टर बनना चाहता था। उसकी कड़ी मेहनत ने उसे सफलता दिलाई।"

उसकी खुश मां ने कहा, "शुभम अपने माता-पिता और भाई-बहनों को दिन-रात कड़ी मेहनत करते देखकर बड़ा हुआ। उसने कड़ी मेहनत करना सीखा और सफल हुआ,"  

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed